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नाटक ‘एक और द्रोणाचार्य’ में व्यवस्था पर सवाल

रंगनाट््यम इंटिमेट थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन बुधवार को रवींद्र मंच पर चंडीगढ़ के संवाद नाट््य ग्रुप ने नाटक 'एक और द्रोणाचार्य का मंचन किया। नाटक में मुख्य अतिथि आईएएस उर्मिला राजोरिया थी। शंकर शेष की ओर से लिखित और मुकेश शर्मा की ओर से निर्देशित नाटक में असत्य का साथ देने वाले मानवीय द्वंद्व को खूबसूरती के साथ प्रस्तुत किया गया।
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नाटक 'एक और द्रोणाचार्य' में व्यवस्था पर सवाल

नाटक 'एक और द्रोणाचार्य' में व्यवस्था पर सवाल

जयपुर. नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर के सहयोग से स्माइल एंड होप संस्था की ओर से आयोजित रंगनाट््यम इंटिमेट थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन बुधवार को रवींद्र मंच पर चंडीगढ़ के संवाद नाट््य ग्रुप ने नाटक 'एक और द्रोणाचार्य का मंचन किया। नाटक में मुख्य अतिथि आईएएस उर्मिला राजोरिया थी। शंकर शेष की ओर से लिखित और मुकेश शर्मा की ओर से निर्देशित नाटक में असत्य का साथ देने वाले मानवीय द्वंद्व को खूबसूरती के साथ प्रस्तुत किया गया।

ईनामदारी का नहीं मिला शिक्षक को फल
अरविंद एक ईमानदार और आदर्शवादी शिक्षक है, जो कॉलेज के अध्यक्ष के बेटे को एक छात्रा के साथ दुष्कर्म करते हुए पकड़ लेते हैं। साथ ही अध्यक्ष का बेटा नकल करते हुए भी पकड़ा जाता है। बात को दबाने के लिए अध्यक्ष शिक्षक अरङ्क्षवद को लालच देता है और धमकाता है। विवश होकर अरविंद सत्ता के आगे झुक जाता है और रिपोर्ट वापस कर लेता है। इसके बाद अरविंद मन के द्वंद्व में फंसा रहता है, जिसके कारण वो चिड़चिड़ा हो जाता है। वहीं विमलेंदु भी एक शिक्षक है, उसने आदर्शों के आगे समझौता नहीं किया, किंतु उसे जान गंवानी पड़ गई। यह स्थिति जानकर अरविंद मन ही मन ग्लानि भाव से जूझता है। विमलेंदु का संघर्ष उससे कहता है कि यदि समाज तुम्हें भौंकने वाला कुत्ता बनाना चाहता है, तो तुम बनो, क्योंकि तुम व्यवस्था के विपरीत नहीं चल सकते। यदि चलोगे तो तुम्हें भी मेरी ही भांति मार दिया जाएगा। नाटक में शिक्षक को ही अपने सवालों में फंसा दिखाया है जैसे -युद्धभूमि में द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर से पूछा था कि कौन मारा गया- अश्वत्थामा नाम का हाथी या पुत्र। विमलेन्दु का अंतिम वाक्य से नाटक समाप्त होता है कि तू द्रोणाचार्य है। व्यवस्था व कोड़ों से पिटा द्रोणाचार्य। नाटक का उद्देश्य पौराणिक कथा को दोहराना ही नहीं, बल्कि सूक्क्षतम मानवीय सत्य को खोजना है।

इन्होंने किया अभिनय
नाटक में अरविंद शर्मा, हिमांशी राजपूत, कमल भारद्वाज, आशीष, चेतना, मुकेश शर्मा, कृष्णा भट्ट, सौरभ, रजनी बजाज, शिवराज, उदय प्राशर, सुशांत ने अभिनय से दर्शकों पर छाप छोड़ी। नाटक में प्रकाश व्यवस्था चेतन का था और संगीत काव्य सपरा का रहा।