
आरएसी जवान के अंतिम संस्कार के दौरान की तस्वीर (फोटो-पत्रिका)
जयपुर। रायसर क्षेत्र में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब जयपुर सेंट्रल जेल में तैनात आरएसी जवान गिरधारी लाल गुर्जर (38) का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह उनके पैतृक गांव घठाजरी कुशलपुरा पहुंचा। संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से हुई मौत के बाद जब उनका शव तिरंगे में लिपटा घर पहुंचा, तो परिजनों और ग्रामीणों का दर्द छलक पड़ा और पूरे गांव में कोहराम मच गया।
जैसे ही पार्थिव शरीर घर की चौखट पर लाया गया, परिजन बिलख उठे और आसपास मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। अंतिम दर्शन के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। हर कोई अपने इस जांबाज सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचा। माहौल इतना भावुक था कि हर तरफ सिर्फ सिसकियां और शोक की आवाजें सुनाई दे रही थीं।
अंतिम यात्रा पूरे राजकीय सम्मान के साथ निकाली गई। इस दौरान रायसर थाना पुलिस, आरएसी के जवान और कंपनी कमांडर सुशील कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। जवानों ने अपने साथी को कंधा दिया और श्मशान तक पूरे सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली। वहां आरएसी के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए सलामी दी और पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।
श्मशान घाट पर उस समय माहौल और भी भावुक हो गया, जब उनके 17 वर्षीय बेटे सागर सिंह गुर्जर ने पिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं और कई लोग खुद को रोने से नहीं रोक पाए। परिवार पर टूटे इस दुख ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया।
गिरधारी लाल गुर्जर वर्ष 2012 की भर्ती में चयनित हुए थे और 2013 से आरएसी की 13वीं बटालियन, चैनपुरा (जयपुर) में सेवाएं दे रहे थे। वे संयुक्त परिवार में रहते थे और दो भाइयों में बड़े थे। परिवार में पिता श्योराम गुर्जर, भाई हीरालाल, पत्नी संती देवी, पुत्र सागर सिंह और पुत्री आरती हैं। गांव में वे एक ईमानदार और मेहनती जवान के रूप में जाने जाते थे तथा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए थे।
Updated on:
20 Apr 2026 08:17 pm
Published on:
20 Apr 2026 08:16 pm
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