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IPS Dinesh MN: ‘एक बार में डोसे की 16 प्लेट’! राजस्थान के IPS दिनेश एमएन ने शेयर की तस्वीरें, जानिए इस ऐतिहासिक रेस्तरां की दिलचस्प कहानी  

Vidyarthi Bhavan Bengaluru: राजस्थान पुलिस के ADG दिनेश एमएन ने बेंगलुरु के मशहूर 'विद्यार्थी भवन' से शेयर की तस्वीरें। जानिए इस ऐतिहासिक रेस्तरां और बेने मसाला डोसे की क्या है खासियत।
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जयपुर

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Nakul Devarshi

•

Updated: 24 Oct 2026, 3:26 PM IST

rajasthan adg dinesh mn shares photos from bengaluru iconic vidyarthi bhavan

बेंगलुरु के 'विद्यार्थी भवन' रेस्त्रां में आईपीएस दिनेश एमएन

राजस्थान पुलिस के सबसे तेजतर्रार और चर्चित आईपीएस अधिकारियों में शुमार, एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) व एटीएस के प्रमुख ADG दिनेश एमएन अपने एक अलग अंदाज के कारण चर्चा में हैं। अपनी सख्त कार्यशैली, अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाइयों और 'सिंघम' वाली छवि के लिए पूरे देश में पहचाने जाने वाले आईपीएस दिनेश एमएन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक रेस्तरां 'विद्यार्थी भवन' से कुछ तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में वे अपने परिवार के सदस्यों के साथ नजर आ रहे हैं और इस प्रतिष्ठित फूड आउटलेट की पुरानी यादों व खानपान का आनंद ले रहे हैं।

दिनेश एमएन ने सोशल मीडिया पर तीन तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "At the iconic restaurant Vidyarthi Bhawana in Bangalore. Started in 1943, serving delicious Dosas stacked one upon the other, this place has been a delight for morning walkers in Lalbagh and has been part of the culinary history of the city." (बेंगलुरु के मशहूर रेस्तरां 'विद्यार्थी भवन' में। 1943 में शुरू हुई यह जगह, जहाँ एक के ऊपर एक रखे स्वादिष्ट डोसे परोसे जाते हैं, लालबाग में सुबह टहलने वालों के लिए हमेशा से एक खास जगह रही है और यह शहर के खान-पान के इतिहास का भी हिस्सा रही है।)

क्या है बेंगलुरु के 'विद्यार्थी भवन' का इतिहास?

बेंगलुरु के बसवनगुड़ी स्थित गांधी बाजार जैसे पुराने और सांस्कृतिक इलाके में स्थित 'विद्यार्थी भवन' कोई सामान्य रेस्तरां नहीं है, बल्कि यह शहर की पाक कला का एक जीवंत प्रतीक है। इस ऐतिहासिक भोजनालय की स्थापना वर्ष 1943 में अच्युत राया द्वारा की गई थी। शुरुआत में इसे पास के नेशनल कॉलेज और आचार्य पाठशाला के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर खोला गया था, ताकि पढ़ाई के बाद छात्रों को बेहद कम कीमत पर शुद्ध और स्वादिष्ट दक्षिण भारतीय नाश्ता मिल सके। छात्रों के लिए शुरू किए जाने के कारण ही इसका नाम 'विद्यार्थी भवन' रखा गया था।

आगे चलकर 1970 के दशक में इसे परमेश्वर राव ने संभाल लिया और आज भी यह उन्हीं के परिवार (अरुण कुमार अदिया) द्वारा पूरी पारंपरिक गर्मजोशी के साथ चलाया जा रहा है। इस छोटी सी जगह की दीवारों पर बेंगलुरु के प्रसिद्ध कलाकारों, साहित्यकारों और प्रतिष्ठित हस्तियों के पुराने स्केच लगे हुए हैं, जो आगंतुकों को पुराने दौर के बेंगलुरु की याद दिलाते हैं। यहाँ तक कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, बैडमिंटन लीजेंड प्रकाश पादुकोण और देश-विदेश के कई बड़े फिल्मी सितारे भी इस ऐतिहासिक रेस्तरां में आकर यहाँ के प्रसिद्ध डोसे का स्वाद चख चुके हैं।

अपने अनोखे स्वाद और परोसने के अंदाज के लिए है मशहूर

विद्यार्थी भवन का मेन्यू बहुत बड़ा नहीं है, बल्कि यह अपनी चुनिंदा और पारंपरिक चीजों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहाँ की मुख्य खासियतों में शामिल हैं:

बेने मसाला डोसा : यहाँ का डोसा आम डोसे की तरह पतला या पेपर क्रिस्पी नहीं होता। यह थोड़ा मोटा, बाहर से बेहद करकरा और अंदर से मक्खन की तरह मुलायम होता है, जिसमें भरपूर मात्रा में शुद्ध मक्खन का इस्तेमाल किया जाता है। इसे नारियल और पुदीने की खास चटनी के साथ परोसा जाता है (यहाँ डोसे के साथ सांभर नहीं मिलता)।

वेटर का अनूठा स्टाइल: यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ के वेटर होते हैं, जो एक ही हाथ पर एक के ऊपर एक 15 से 20 डोसे की प्लेटें सजाकर फुर्ती और संतुलन के साथ ग्राहकों की टेबल तक पहुंचाते हैं।

अन्य लोकप्रिय व्यंजन: डोसे के अलावा यहाँ का रवे वडे (Rava Vada), इडली, खारा भात, केसरी भात और अंत में मिलने वाली कड़क फिल्टर कॉफी बेहद पसंद की जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह आज भी बेहद किफायती है, जहाँ दो लोग मात्र 100 से 200 रुपये में पेट भरकर नाश्ता कर सकते हैं।

आज़ादी के समय से चली आ रही है अनोखी परंपरा

इस रेस्तरां से जुड़ी एक और दिलचस्प बात यह है कि यह हर शुक्रवार को पूरी तरह बंद रहता है। यह परंपरा देश की आजादी यानी साल 1947 के समय से लगातार चली आ रही है। इसके अलावा, यहाँ की लोकप्रियता इतनी है कि वीकेंड (शनिवार और रविवार) पर यहाँ लोगों को अपनी बारी के लिए 45 मिनट से 1 घंटा तक लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है। जगह की कमी के कारण यहाँ 'टेबल शेयरिंग' की पुरानी संस्कृति आज भी जीवित है, जहाँ अनजान लोग भी एक ही मेज पर बैठकर नाश्ते का आनंद लेते हैं।

कौन हैं आईपीएस दिनेश एमएन?

मूल रूप से कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले के मुंगनहल्ली से ताल्लुक रखने वाले मुंगनहल्ली नारायणस्वामी दिनेश (M. N. Dinesh) 1995 बैच के राजस्थान कैडर के बेहद चर्चित आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने कर्नाटक के दावणगेरे स्थित बीपीडी कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा पास की थी। वर्तमान में वे राजस्थान पुलिस में अतिरिक्त महानिदेशक (ADGP) के पद पर तैनात हैं और उनके पास एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF), एटीएस (ATS) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों की कमान है।

अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने राजस्थान के सबसे कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के खात्मा अभियान से लेकर लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा गिरोह के गुर्गों पर शिकंजा कसने में बड़ी भूमिका निभाई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी (ACB) में रहते हुए उनके द्वारा की गई बड़ी कार्रवाइयों के कारण उन्हें राजस्थान की जनता और पुलिस महकमे में एक सख्त, निडर और जांबाज 'सिंघम' अधिकारी के रूप में देखा जाता है। व्यस्त और तनावपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच बेंगलुरु की अपनी इस निजी यात्रा के दौरान परिवार संग समय बिताते हुए उनकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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