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राजस्थान में भिवाड़ी व कोटा की हवा बहुत खराब, पढ़े पूरी खबर

राजस्थान में वायु प्रदूषण का असर खतरे की सीमा को पार कर रहा है। इसके चलते वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में पहुंच रहा है और कुछ जिलों की हवा जहरीली हो गई है।

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राजस्थान में भिवाड़ी व कोटा की हवा बहुत खराब, पढ़े पूरी खबर

राजस्थान में भिवाड़ी व कोटा की हवा बहुत खराब, पढ़े पूरी खबर

जयपुर। राजस्थान में वायु प्रदूषण का असर खतरे की सीमा को पार कर रहा है। इसके चलते वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब श्रेणी में पहुंच रहा है और कुछ जिलों की हवा जहरीली हो गई है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट लगातार खुलासे कर रही है कि फेफड़ों, अस्थमा और हृदय रोग वाले लोग जिन्हें सांस लेने में तकलीफ होती है वे सब बचकर रहें नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

भिवाड़ी और कोटा की हवा बहुत खराब हो चुकी है, जबकि 24 घंटे के भीतर ही जयपुर और जोधपुर की हवा बहुत खराब से खराब स्थिति में आई है। पाली और अमजेर की स्थिति में तेजी से सुधार आ रहा है। उदयपुर की स्थिति में भी कोई सुधार नहीं हो सका है। विशेषज्ञों की माने तो आगामी दो दिन के भीतर जयपुर व जोधपुर की हवा में सुधार हो सकता हैं। बतादें कि दिवाली के साथ ही हवा खराब होने लगी थी, जो अब गंभीर रूप लेती जा रही है। मौसम विभाग की माने तो आगामी दिनों में उत्तरी हवाओं के चलते तापमान में गिरावट होगी और उस दौरान हवा खराब रही तो लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक में उतार-चढ़ाव जारी
बदलते मौसम के बीच दिवाली के साथ ही तापमान में गिरावट, पटाखे और आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं से राजस्थान का वायु गुणवत्ता सूचकांक में उतार-चढ़ाव जारी है। जयपुर की बात की जाए तो दो दिन से जयपुर की हवा खराब चल रही है। वहीं सात दिन पहले यह प्रदूषण का स्तर महज 200 एक्यूआई के आसपास था, जो शनिवार शाम को 274 एक्यूआई पहुंच गया।

भिवाड़ी का एक्यूआई 419 से घटकर 390 पर आ गया है। जोधपुर का 290 से घटकर 286 दर्ज किया गया। अलवर में 203, कोटा में 315, पाली में 159, उदयपुर में 250, अजमेर में 164 सूचकांक रहा। दो दिनों से आसमां में जयपुर समेत अन्य जगहों पर हल्का धुंआ छाया हुआ है। चिकित्सकों ने ऐसे लोगों को ज्यादा से ज्यादा घरों में ही रहने की सलाह दी। पर्यावरणविदों के मुताबिक पटाखों से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने का मुख्य कारण मौसम में बदलाव भी है। तापमान गिरने और हवा नहीं चलने से धुंआ आसमान में ज्यादा ऊपर नहीं जा सका।

बढ़ सकती है अस्थमा के मरीजों की परेशानी
जानकारों की माने तो पिछले साल राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक का लेवल महज 170 एक्यूआई के आसपास था, जबकि इस बार 40 फीसदी से अधिक प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ नजर आया। यह भी साफ हो रहा है कि वायु प्रदूषण की यह स्थिति अगले कुछ दिन तक यूं ही रह सकती है। वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 के पार पहुंचने के बाद अस्थमा के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ जाती है। पुराना अस्थमा के मरीजों को धुंआ होने के कारण आंख और नाक में हल्की जलन होना, जी घबराना, सिरदर्द जैसी शिकायतें भी कई लोगों में आती है।