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राजस्थान से जुड़ा राम मंदिर अयोध्या का एक और रिश्ता, Shri Ram Stambh के जरिए होगा राम की महिमा का बखान

Shri Ram Stambh : अयोध्या में बन रहे राम मंदिर का राजस्थान से अटूट रिश्ता स्थापित हो गया है। अब सिरोही के आबूरोड़ में श्रीराम स्तंभ का निर्माण किया जा रहा है। पहला श्रीराम स्तंभ अयोध्या पहुंचा गया है। श्रीराम स्तंभ से जुड़ी कई अहम बातें जानें।

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Shriram Stambh

राजस्थानी पत्थरों से अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाया जा रहा है। भगवान राम की अयोध्या और राजस्थान का एक और रिश्ता जुड़ने जा रहा है। अयोध्या से रामेश्वरम तक जहां-जहां चरण पड़े रघुवर के वहां-वहां श्रीराम स्तंभ लगाए जाएंगे। श्रीराम स्तंभ से भागवान राम की महिमा का बखान किया जाएगा। अयोध्या से रामेश्वर तक श्री राम के वन गमन मार्ग पर श्रीराम स्तंभ लगाए जाएंगे। करीब 2500 किलोमीटर लंबे वन गमन मार्ग पर 290 स्थान को चिन्हित किया गया है। इन स्थानों पर श्रीराम स्तंभ लगाए जाएंगे। साथ ही इन स्थानों की महिमा बताई जाएगी। इन श्रीराम स्तंभों को राजस्थान के सिरोही जिले के आबू रोड में आकार दिया जा रहा है। पहला श्रीराम स्तंभ आबू रोड से अयोध्या के लिए रवाना हो गया है।

यह रविवार को अयोध्या के कारसेवक पुरम में पहुंचा गया है। श्रीराम स्तंभ पर कलाकृतियों के साथ रामायण के श्लोक होंगे। इसका हिंदी और अंग्रेजी सहित चार भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा। श्रीराम स्तंभ पर स्थान का नाम संदर्भ भौगोलिक महत्व भी अंकित होगा। सेंडस्टोन से निमित्त पहला श्रीराम स्तंभ अयोध्या में मणि पर्वत पर स्थापित होगा। पिंकसैंड स्टोन्स से निर्मित श्रीराम स्तम्भ की ऊंचाई 15 फीट तथा चौड़ाई तीन से चार फीट है।



इन 290 स्थानों को किसने खोजा जानें

श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान के रिसर्चर राम अवतार शर्मा (72 वर्ष) वह व्यक्ति हैं जिन्होंने करीब 40 साल तक अध्ययन कर उन 290 स्थानों की पहचान की, जहां श्रीराम गमन के दौरान रुके थे। अशोक सिंघल फाउंडेशन और M2k फाउंडेशन इन स्तंभों का निर्माण का खर्च उठा रहा है।

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श्रीराम स्तम्भ को मणिपर्वत के प्रांगण में किया जाएगा स्थापित

विहिप मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि एक अक्टूबर को शिविर समापन के पूर्व दोपहर 12 बजे अशोक सिंहल फाउंडेशन द्वारा संत-धर्माचार्यो और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय सहित विशिष्ट जनों की विशेष उपस्थिति में श्रीराम स्तम्भ का अयोध्या धाम पहुंचने पर कारसेकपुरम् में पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद स्तम्भ को मणिपर्वत के प्रांगण में स्थापित कर श्रीराम वन गमन मार्ग पर लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी।

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