
जयपुर। भाजपा व कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में नए लोगों को टिकट दिया और जनता ने भी इन्हें सदन में पहुंचा दिया। 14वीं विधानसभा में इस बार करीब 42 प्र्रतिशत प्रत्याशी पहली बार चुनकर पहुंचे। 84 एेसे विधायक हैं, जो पहली बार चुन कर आए हैं। 50 साल से कम के 57 विधायक चुन कर आए।
इन नेताओं में नया जोश भी दिखा और जनता और राजनीतिक दलों में भी इनसे उम्मीदें काफी बढ़ गईं, लेकिन जैसे-जैसे साल गुजरे, वैसे-वैसे यह उम्मीदें नकारात्मकता में बदल गईं। आज हालत यह है कि संगठन हो या जनता, सबसे यही आवाज आ रही है कि नए विधायकों से जो उम्मीदे थी, वह पूरी नहीं हो सकीं। भाजपा हो या कांग्रेस, एेसे नए विधायकों की संख्या कम ही रही, जिन्होंने अपनी पहचान बनाई।
जिनकी पकड़, मात्र 10-15 फीसदी
10-15 प्रतिशत विधायक ही एेसे हैं, जिनकी अपनी क्षेत्र में अच्छी पकड़ है और वे सदन में भी सक्रिय रहे। कांग्रेस को विपक्ष में रहने का फायदा मिला। इसके करीब 30 प्रतिशत नए विधायकों की सदन में अच्छी सक्रियता दिखी। सभी नए विधायकों की बात की जाए तो 12-15 प्रतिशत नए विधायक ही एेसे रहे हैं, जिन्होंने सदन व क्षेत्र में छाप छोड़ी है।
पहली बार में ही सत्ता में मिली भागीदारी
अरुण चतुर्वेदी पहली बार विधायक बने और सरकार ने उन्हें सीधे केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया। इसी तरह धन सिंह रावत को पंचायती राज राज्य मंत्री का दर्जा मिला। इसी तरह पहली बार विधायक बने सुरेश रावत, शत्रुघ्न गौतम, जितेन्द्र गोठवाल, लादूराम विश्नोई, नरेन्द्र नागर, भीमा भाई,आेम प्रकाश हुड़ला, कैलाश वर्मा और भैरा राम चौधरी को सरकार ने संसदीय सचिव बना दिया।
कांग्रेस ने इनको दी संगठन में जिम्मेदारी
पहली बार विधायक बनी शकुंतला रावत को महिला कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बना रखा है। इसी तरह धीरज गुर्जर और घनश्याम को प्रदेश महासचिव का पद दिया हुआ है। अशोक चांदना यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। राजेन्द्र यादव को जयपुर देहात का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह सुखराम विश्नोई, दर्शन सिंह को भी पार्टी ने प्रदेश टीम में ले रखा है।
पहली बार इतनी विधायक बनी महिलाएं
इस विधानसभा में पहली बार जीत कर आई महिलाओं की संख्या 15 है। इनमें से बारह महिलाएं भाजपा, दो जमींदारा पार्टी और एक कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर जीत कर विधानसभा में पहुंची हैं।
पहली बार में ही छोड़ी छाप
भाजपा दीया कुमारी- जयपुर पूर्व राजघराने की सदस्य दीया कुमारी को भाजपा ने सवाईमाधोपुर से टिकट दिया। ये जीतीं भी और इसके बाद से लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं। संगठन ने जब नए विधायकों के कामकाज की समीक्षा की तो दीया कुमारी की सक्रियता अन्य विधायकों के मुकाबले अधिक दिखीं। सुरेश धाकड़- भाजपा ने धाकड़ को चित्तौडग़ढ जिले की बेगूं से टिकट दिया। इन्होंने क्षेत्र में दस करोड़ से ज्यादा के काम करवाए। एेसी जगह भी पानी पहुंचाया, जहां दशकों से पानी नहीं पहुंचा था। क्षेत्र में सक्रियता भी बनी हुई है।
कांग्रेस
शकुंतला रावत- अलवर जिले की बानसूर विधानसभा सीट से जीत कर आईं रावत पहली बार में ही अपनी छाप छोडऩे में सफल रहीं है। विधानसभा में उन्होंने क्षेत्र समेत महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय हैं। इसी के बलबुते वे कांग्रेस की राष्ट्रीय टीम में जाने में सफल हुई हैं। भंवर सिंह भाटी- भाजपा के दिग्गज नेताओं में से एक देवी सिंह भाटी को हराकर कोलायत सीट से जीत दर्ज की। जीत का अंतर तो ज्यादा बड़ा नहीं रहा, लेकिन जीत दर्ज करने के बाद से ही यह क्षेत्र में सक्रिय बने रहे हैं। सदन में भी उनकी सक्रियता बनी रही है।
किस पार्टी के कितने विधायक बने पहली बार
कांग्रेस- 12
निर्दलीय-2
बसपा- 2
राजपा- 1
जमींदारा पार्टी- 2
भाजपा- 65
किस उम्र में कितने विधायक बने पहली बार
25 से 35- 14
36 से 50- 43
51 से ऊपर- 27
फेक्ट फाइल -
14वीं विधानसभा की सबसे कम उम्र की पहली बार बनी विधायक- 25 वर्ष की उम्र में जमींदारा पार्टी की कामिनी जिंदल विधायक बनीं।
14 वीं विधानसभा में सबसे ज्यादा उम्र के पहली बार बने विधायक-72 वर्ष की उम्र में कांग्रेस के रामनारायण गुर्जर विधायक बने। यह उपचुनाव में जीत कर विधायक बने थे।
इनका कहना है
नया हो या पुराना विधायक। सभी अपने-अपने क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं। किस विधायक को दुबारा मौका मिलेगा, यह तो उसके काम के आधार पर ही तय होगा।
- मदन लाल सैनी, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
राजनीति में युवा आ रहे हैं। उनमें एनर्जी तो होती ही है, वे फील्ड में नई सोच के साथ काम करते हैं। पार्टी का प्रयास रहेगा कि नए खून को आगे लाएं। हमारे विधायकों ने अच्छा काम किया है।
मुमताज मसीह, महासचिव, कांग्रेस
Published on:
06 Sept 2018 07:10 am
