
जयपुर। राजस्थान की राजनीति का आधी सदी का गवाह रहा है सवाई मानसिंह टाउन हॉल (Sawai Man Singh Town Hall) । इस भवन में राजनीतिक गतिविधियां भले ही बंद हो गई, लेकिन भवन राजनीति दावपेच से दूर नहीं हो सका। टाउन हॉल की रौनक वापस लाने के लिए कांग्रेस ने विश्वस्तर का म्यूजियम बनाने की 45 करोड़ की योजना तैयार की।
भाजपा सरकार के आते ही काम धीमा हुआ और फिर बंद हो गया। इस बीच पूर्व राजपरिवार ने भी मालिकाना विवाद का हवाला देते हुए सरकार को पत्र लिख दिया। हाल यह है कि भवन के ताले लगे हैं और उसकी फाइल आमेर विकास प्राधिकरण में धूल फांक रही है। जलेब चौक स्थित इस भवन में राजस्थान विधानसभा वर्ष 2000 तक संचालित होती थी। विधानसभा ज्योति नगर स्थित नए भवन में स्थानांतरित होने के साथ ही भवन सुनसान हो गया। भीड़भाड़ वाले गलियारे खाली हो गए।
यह भी माना जा रहा कारण
पूर्व राजपरिवार की ओर से मालिकाना हक को लेकर पत्र लिखना भी काम रुकने के पीछे कारण माना जा रहा है। सरकार के काम रोकने के कदम से अधिकारी ऐसे सहमे कि निर्माण कार्य तो दूर उससे सम्बंधित फाइल की ओर देखना भी बंद कर दिया। काम का जिम्मा संभालने वाली कम्पनी को भी जवाब नहीं मिला। कम्पनी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
यह है इतिहास
सवाई मानसिंह टाउन हॉल का निर्माण महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय ने महारानी चंद्रावतजी के लिए कराया था। भवन निर्माण शुरू होने के कुछ दिन बाद ही महारानी की मृत्यु होने से महाराजा ने इसे महल के बजाय रियासतकालीन कौंसिल का सभागार बनवा दिया। 1952 में राजस्थान विधानसभा के प्रथम चुनाव हुए, तब सवाई मानसिंह टाउन हॉल में विधानसभा को स्थापित किया गया। 1952 से 2000 तक भवन के रूप में यह प्रदेश की राजनीति का केन्द्र रहा।
कागजों में बनी योजनाएं, किसी का ध्यान नहीं
कागजों में कई योजनाएं बनी, लेकिन भवन पर किसी ने ध्यान नहींं दिया। भवन फिर राजनीति के केन्द्र में आया तो विवाद को लेकर। इसके उपयोग को लेकर भी राजनीति शुरू हो गई। कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2011-12 के बजट में टाउन हॉल को विश्वस्तर का म्यूजियम बनाने की घोषणा कर दी। कार्यकाल के आखिरी समय 2013 मेंकाम का उद्घाटन किया। इसके लिए 45 करोड़ रुपए की योजना तैयार की और काम युद्ध स्तर पर शुरू किया। कुछ दिनों में ही विदेशी कम्पनी ने यहां करोड़ों रुपए खर्च कर दिए।
Published on:
17 Oct 2018 09:57 am
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