राजेन्द्रसिंह देणोक
मई का महीना हो और जैसलमेर की यात्रा का कार्यक्रम बन जाए तो एक बारगी माथे पर शिकन आना तय है। क्योंकि, मई-जून में यहां का तापमान आमतौर पर 40 डिग्री से ज्यादा ही रहता है। लेकिन, जैसा आप समझ रहे हैं वैसा इस बार नहीं है। मौसम के उतार-चढ़ाव और बारिश ने फिजां बदल दी है। पाली से तीन सौ किलोमीटर की यात्रा कर मैं भरी दोपहरी में खेतोलाई गांव पहुंचा। यह वही गांव है जो 11-13 मई 1998 के परमाणु परीक्षणों का गवाह रहा।