चन्द्रप्रकाश जोशी/झुंझुनूं। जिले के सूरजगढ़ कस्बे की स्थापना राजा सूरजमलसिंह शेखावत ने की थी। सूरजगढ़ की खास बात ये है कि यहां से खाटू निशान ले जाने की परंपरा 325 साल पहले शुरू हुई और सूरजगढ़ के निशान को ही खाटूश्याम मंदिर के शीर्ष पर जगह मिलती है। उधर, पिलानी के नाम के पीछे भी एक कहानी प्रचलित है। पिलानिया गोत्र का एक योद्धा यहां के राजा के किले की रक्षा करते हुए शहीद हुआ था।
राजा ने उसके सम्मान में इस जगह का नाम पिलानी रख दिया। प्रसिद्ध उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला का पैतृक स्थल पिलानी देश के उत्कृष्ट संस्थानों में से एक बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (बिट्स), पिलानी और सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीईईआरआई-सीरी) के लिए प्रसिद्ध है। बड़ी पहचान रखने वाले कस्बे नाम के भले ही मोहताज न हों, लेकिन विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए यहां के बाशिंदे आज भी तरस रहे हैं। आजादी के 75 साल बाद भी सरकार यहां पानी तक ठीक से नहीं पहुंचा पाई है।