
जयपुर।
इकोलॉजिकल जोन में बसी 2 लाख आबादी को हटाने से बचाने और राज्य में 27 लाख निर्माण के अवैध हिस्से को कम्पाउंडिंग के जरिए वैध कराने के लिए सरकार फिर जुट गई है। मास्टर प्लान मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आठ अगस्त को सुनवाई है।
सरकार चुनावी साल में ऐसे तीन मामलों में राहत के लिए पुख्ता पैरवी की तैयारी कर रही है। सरकार ने बड़ी संख्या में निर्माण टूटने और आबादी प्रभावित होने का हवाला देते हुए रियायत चाही है। हालांकि, यहां बसे लोगों की सुविधाओं को लेकर प्लान नहीं बताया। सरकार व जेडीए दोनों अलग-अलग पक्षकार हैं और दोनों के प्रभारी अधिकारियों (ऑफिसर इंचार्ज) को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि जोधपुर हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान मामले में विस्तृत आदेश दिए हैं, लेकिन सरकार इसकी अक्षरशः पालना करने की बजाय सुप्रीम कोर्ट से राहत की गली ढूंढ रही है। इधर, जिस इरादे से सरकार अवैध को वैध निर्माण में तब्दील करने की कवायद अगर सफल हो जाती है, तो ज़ाहिर है चुनावी वर्ष में इसका सियासी फ़ायदा सरकार को मिल सकता है। सरकार का यही फ़ायदा, विरोधियों के लिए झटका माना जाएगा।
झूठ... क्योंकि कार्रवाई में 'पिक एंड चूज'
मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज के विपरीत निर्माण मामले में सिस्टम की पोल खुलती रही है। रिपोर्ट में साफ अंकित है कि राज्य में करीब 7 से 8 लाख से ज्यादा निर्माण ऐसे हैं जो अवैध हैं, लेकिन अब इन्हें ध्वस्त नहीं किया सकता है क्योंकि ज्यादातर में आजीविका के संसाधन भी संचालित हो रहे हैं। लेकिन राज्यभर में ऐसे निर्माण को ध्वस्त व सील करने के लिए 'पिक एंड चूज' का खेल चल रहा है।
इन बिंदुओं पर चाह रहे राहत
हाईकोर्ट ने 12 जनवरी 2017 को 35 बिंदुओं पर विस्तृत आदेश दिए। सरकार का कहना है कि इनमें से 32 बिन्दु मानने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन तीन बिन्दुओं पर राहत की जरूरत है। सरकार का तर्क है कि अब वहां आबादी है, जिसे हटाना जनहित में नहीं होगा।
रियायत का यह आधार
- 2011 तक के मास्टर प्लान में इकोलोजिकल क्षेत्र 481 वर्ग किलोमीटर आरक्षित था, लेकिन तत्कालीन सरकार में इसमें से 80 वर्ग किलोमीटर इलाके का भू उपयोग बदल दिया गया। यहां कई शैक्षणिक संस्थानों को जमीन आवंटन कर दिया गया था। मास्टर प्लान 2025 में 681 वर्ग किमी. इकोलोजिकल हिस्सा जोड़ा गया। ऐसे में अब कुल इकोलॉजिकल क्षेत्र करीब 894 वर्ग किमी. हो गया। यानी, इकोलोजिकल क्षेत्र बढ़ गया। हालांकि, पिछले मास्टर प्लानों में चिह्नित इकोलोजिकल क्षेत्र को खत्म करने पर ही कोर्ट ने नाराजगी जताई थी।
- इकोलॉजिकल जोन, ग्रीन एरिया में निर्माण को लेकर सरकार ने 2007 की सेटेलाइट इमेज भी सौंप चुकी है। इसमें बताया गया है कि इन चिह्नित इलाकों में ज्यादातर आवास व अन्य निर्माण 1 सितम्बर, 1998 तक ही हो चुके थे, जब मास्टर प्लान 2011 लागू हुआ था।
Published on:
03 Jul 2023 01:57 pm
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