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Rahul Gandhi Rajasthan Visit : सत्ता में बने रहकर ‘परंपरा’ तोड़ने का मिशन, राहुल दौरे से पहले समझें ‘चुनावी गणित’

Rahul Gandhi Rajasthan Visit : आदिवासियों में पैठ बनाने की कोशिश में जुटी कांग्रेस, राहुल गांधी की बड़ी सभा का आयोजन, पिछली बार कांग्रेस और भाजपा को बराबर सीट मिली थी वागड में, बीटीपी ने लगाई थी दोनों पार्टियों के वोट बैंक में सेंध

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जयपुर।

प्रदेश में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने चुनाव के लिए कमर कस ली है। कांग्रेस चुनाव का बिगुल बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में फूंकेगी। इस जगह पर बड़ी सभा आयोजित कर कांग्रेस राजस्थान के साथ-साथ मध्यप्रदेश की आदिवासी बाहुल्य सीटों पर भी असर डालने की तैयारी कर रही है।

गौरतलब है कि वागड में पिछली बार कांग्रेस और भाजपा की बराबर सीटे रही थी। इन दोनों के वोट बैंक में बीटीपी ने सेंध लगाई थी। इसको देखते हुए कांग्रेस और भाजपा लगातार वागड क्षेत्र पर फोकस कर रहे हैं। इस कड़ी में वर्तमान सरकार ने बांसवाड़ा को अलग संभाग बनाकर क्षेत्र के लोगों को अपने से जोड़ने की कोशिश की है।

आज आएंगे राहुल गांधी
राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कांग्रेस के कई बड़े नेता बुधवार को मानगढ़ धाम पर आएंगे। यहां होने वाली सभी को लेकर पार्टी नेता व कार्यकर्ता तैयारियों में जुटे हैं। आदिवासियों के बीच में विश्व आदिवासी दिवस मनाने को लेकर कांग्रेस ने पूरी तैयारी की है। केंद्रीय आला नेताओं के अतिरिक्त मानगढ़ धाम पर होने वाली सभा में प्रदेश के कई मंत्री व नेता सम्मिलित होंगे।

कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदरसिंह रंधावा, राष्ट्रीय सचिव निजामुद्दीन काजी बांसवाड़ा में डेरा डाले हुए हैं। पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी मंगलवार को बांसवाड़ा आएंगे। मानगढ़ सभा की तैयारियों में जल संसाधन मंत्री महेंद्रजीतसिंह मालवीया, जनजाति विकास राज्यमंत्री अर्जुनसिंह बामनिया, जिलाध्यक्ष रमेशचंद्र पंड्या के नेतृत्व में पूरी पार्टी जुटी है।

राजस्थान के साथ एमपी पर भी असर
कांग्रेस ने खुद को आदिवासियों का हितचिंतक निरूपित किया है। ऐसे में राजस्थान व मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और अन्य दलों को पटकनी देने और परम्परागत आदिवासी वोट बैंक को बनाए रखने के लिए इस सभा के लिए कांग्रेस पूरा जोर लगा रही है।

आरक्षित सीटों पर है नजर
कांग्रेस की नजर बांसवाड़ा और उदयपुर संभाग की सभी आरक्षित सीट और मध्य प्रदेश की 12 आरक्षित सीट पर है। प्रदेश में सरकार बनाने में वागड़-मेवाड़ की सीटों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। मुख्यमंत्री भी लगातार वागड़ अंचल के दौरे पर भी रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में अन्य पार्टियों ने कांग्रेस के वोटबैंक में सेंध जरूर लगाई है।

कांग्रेस और भाजपा रहे थे बराबर
गत विधानसभा चुनाव में बांसवाड़ा-डूंगरपुर की 9 विधानसभा में से कांग्रेस 3 सीट जीत पाई थी। राज्य सरकार की ओर से बांसवाड़ा को संभाग बनाने से इसमें प्रतापगढ़ जिला भी जुड़ गया है। ऐसे में बांसवाड़ा संभाग की 11 सीटों में से अभी कांग्रेस पांच पर काबिज है। कुशलगढ़ से निर्दलीय रमीला खड़िया ने भी सरकार को समर्थन दिया है। वहीं भाजपा तीन और बीटीपी का दो सीटों पर कब्जा है।