6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Election 2023 : अंतिम समय तक जुटे रहे सीएम गहलोत, फिर भी जनता से किए इन वादों को नहीं कर पाए पूरा, देखें पूरी लिस्ट

Rajasthan Assembly Election 2023 : राज्य की कांग्रेस सरकार शुरुआती दौर में लंबे समय तक सत्ता के दांव-पेच में उलझी रही, लेकिन बाद में नए जिलों से लेकर महंगाई राहत गारंटी तक तमाम घोषणाएं पूरी कर आदेश जारी करा दिए।

3 min read
Google source verification

जयपुर

image

Kirti Verma

Oct 11, 2023

photo_6129659926671374758_x.jpg

जयपुर. Rajasthan Assembly Election 2023 : राज्य की कांग्रेस सरकार शुरुआती दौर में लंबे समय तक सत्ता के दांव-पेच में उलझी रही, लेकिन बाद में नए जिलों से लेकर महंगाई राहत गारंटी तक तमाम घोषणाएं पूरी कर आदेश जारी करा दिए। आचार संहिता लगने तक बोर्ड व आयोगों के गठन के आदेश जारी होते रहे, फिर भी वर्तमान कांग्रेस सरकार की ओर से विधानसभा चुनाव 2018 के जन घोषणा पत्र में किए कई वादे पूरे नहीं हो सके।

कांग्रेस ने जन घोषणा पत्र में 412 वादे जनता से किए थे। सरकार दावा कर रही है कि 90 प्रतिशत से अधिक घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन कुछ प्रमुख घोषणाएं पूरी नहीं हो सकीं। राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में चुनावी घोषणा पत्र के सर्वाधिक वादे पूरे किए, लेकिन राज्य में जवाबदेही कानून लागू करने की मांग अधूरी ही रह गई। इसी तरह स्वास्थ्य का अधिकार कानून का वादा भी जन घोषणा पत्र में शामिल था, लेकिन वह भी कागजों तक ही पूरा हो पाया है। एक दिन पहले चुनाव आचार संहिता लग चुकी है, इसलिए ऐसे ही कई वादे अब पूरे होना संभव नहीं है।

यह भी पढ़ें : Rajasthan Election : चुनाव तारीखों एलान, इधर बेरोज़गारों युवाओं से जुड़ी ये खबर आई सामने

जो वादे, वादे ही रह गए...
- जवाबदेही कानून लागू करना, जिसमें आमजन के शिकायत के 30 दिन में समस्या का निवारण किया जाने का वादा किया गया था।

- वनाधिकार अधिनियम से तहत वन क्षेत्रों में निवास कर रहे आदिवासियों एवं परंपरागत वन निवासियों के हक में पत्रों का निष्पादन करना और नियमों का सरलीकरण

- बीपीएल परिवारों का पुनः सर्वे कराना

- पेट्रोल-डीजल को वस्तु एवं सेवा कर के दायरे में लाने के लिए वस्तु एवं सेवा कर परिषद को सिफारिश करना, कुछ दिन पहले कमेटी बनाने के बावजूद सरकार निर्णय नहीं कर पाई।

- देश-विदेश में बसे प्रवासी राजस्थानियों के लिए प्रवासी मंत्रालय का गठन करना

- प्रदेश में मसाला बोर्ड

- फूड प्रोसेसिंग पार्क

- गौचर भूमि विकास बोर्ड का गठन

- हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय का गठन

- राज्य की नदियों, झीलों एवं तालाबों के संरक्षण के लिए विशेष योजना

- धौलपुर, भरतपुर, अलवर एवं सवाई माधोपुर जिलों में चंबल नदी के फ्लडवाटर को आरक्षित कर इस क्षेत्र में सिंचाई के लिए उपलब्ध कराना। शेष राजस्थान में भी सिंचाई के लिए नई संभावनाओं की तलाश करना

- पूर्ववर्ती भाजपा शासन में बंद किए गए 20 हजार स्कूलों को चालू करना, लेकिन कुछ ही खोल पाए।

- स्टूडेंट एडवाइजरी एवं गाइडेंस ब्यूरो खोलना

- निजी शिक्षण संस्थाओं और कोचिंग केंद्रों की गुणवत्ता, शुल्क वृद्धि, कॉपी, किताब, यूनिफॉर्म सहित अन्य तरह के शुल्कों का अनावश्यक दवाब रोकने के लिए नियामक प्राधिकरण का गठन

- निजी स्कूलों को प्रोत्साहन देने और समस्याओं के समाधान के लिए बोर्ड का गठन करना

- राज्य के सभी संविदा कर्मियों को नियमित करने के संबंध में आदेश जारी, लेकिन राज्य कर्मियों की तरह नियमित नहीं किया।

- बढ़ई, सुनार, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, पेंटर, फीटर, मैकेनिक सहित दक्ष कर्मियों के कल्याण के लिए बोर्ड का गठन

- प्रदेश में राष्टीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल जिलों में सूचना प्रोद्योगिकी सिटी सॉफ्टवेयर तकनीकी पार्कों का विस्तार करना

- फिल्म सिटी योजना का साकार रूप देना

- प्रमुख जिला मुख्यालयों के हेरिटेज स्वरूप को संरक्षित करने के लिए हेरिटेज शहरों का सौंदर्यीकरण करना। योजना में शामिल अलवर सहित कई जिलों में योजना बनी पर राज्य सरकार ने बजट ही नहीं दिया

- पत्रकार सुरक्षा अधिनियम बनाना

- अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम के लिए विधेयक पारित, लेकिन कानूनी प्रक्रिया में उलझ कर रह गया।

यह भी पढ़ें : देवउठनी एकादशी पर मतदान दिवस, क्या वोटिंग पर पड़ेगा असर? पत्रिका सर्वे में सामने आए ये नतीजे