
जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मियां तेज है। शहरों से लेकर गांव की गलियों और चाय की दुकानों पर चुनावों की सुगबुगाहट देखने को मिल रही है। आचार संहिता लगने के बाद से जहां राजनीतिक पार्टियां दफ्तरों से बाहर निकलकर वोट बटोरने में लगी हैं, लेकिन इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस और भाजपा के सामने बागी नेता चुनौती के रूप में उभरकर सामने आ सकते हैं। चुनावों में बागियों की सैंधमारी कहीं दोनों पार्टियों पर भारी न पड़ जाए। इसको लेकर पार्टियां सोच समझकर कदम उठा रही है।
चुनावों में बागी बिगाड़ सकते हैं गणित
राजस्थान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस 200 सीटों के लिए लगभग तीन हजार प्रत्याशियों के टिकट वितरण से जूझ रही है। टिकट की लाइन में खड़े प्रत्याशी बागी होकर चुनावों में गणित बिगाड़ सकते हैं। इस बात का अंदेशा जताया जा रहा है। कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने का मन बना रहे नेता बीजेपी के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे प्रत्याशियों को टिकट देकर बीजेपी भी अपने उम्मीदवारों को किनारे करने का खतरा नहीं उठाना चाहती।
विधानसभा चुनावों को लेकर दोनों पार्टियों में उठापटक
कांग्रेस और भाजपा में चुनावों को लेकर उहापोह जारी है। राजनीतिक जानकारों ने ऐसी आशंका जताई है कि बीजेपी से कई उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिलने पर बागी हो सकते हैं। पार्टियों से टिकट की आशा लगाए बैठे उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिलने से नाराज होंगे। इसके चलते अपनी ही पार्टियों को बागी होकर नुकशान में दे सकते हैं। दरअसल, राजस्थान में हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है। एक और जहां बीजेपी सालों से चली आ रही इस परम्परागत राजनीति को तोड़ना चाहती है, वहीं सत्ता की आश में बैठी कांग्रेस इस बार चुनाव जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।
Updated on:
18 Oct 2018 05:57 pm
Published on:
18 Oct 2018 05:46 pm
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