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Rajasthan BJP : राजस्थान में सत्ता और संगठन आमने-सामने! सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं का ‘दर्द’ VIRAL

Rajasthan BJP में आंतरिक असंतोष गहराया। अपनी ही सरकार की ट्रांसफर-पोस्टिंग नीति से नाराज पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का दर्द सोशल मीडिया पर वायरल, बढ़ी सियासी हलचल।
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Rajasthan BJP Workers Social Media Viral Post Transfer Controversy

Rajasthan Transfer Posting Controversy

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों सत्ता और संगठन के बीच आंतरिक असंतोष और गहरी खींचतान की खबरें तेजी से सुर्खियां बटोर रही हैं। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार होने के बावजूद खुद पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और वर्षों से जुड़े निष्ठावान नेताओं का दर्द अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर खुलकर बाहर आने लगा है। अपनी ही सरकार के मंत्रियों की कार्यशैली और खासकर हाल ही में हुए बड़े पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग के फैसलों को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष देखा जा रहा है। एक तरफ जहां विपक्ष लगातार सरकार को प्रशासनिक मुद्दों पर घेर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर से ही उठ रही बगावती और हताशा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक नया और बड़ा सियासी सिरदर्द बनती जा रही हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अलग-अलग पोस्ट और व्हाट्सएप ग्रुप्स के लीक हुए चैट्स इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की सुनवाई शासन स्तर पर नहीं हो पा रही है, जिससे उनके भीतर अपनी ही सरकार के खिलाफ गंभीर नाराजगी पनप रही है।

आरएसएस पृष्ठभूमि के वरिष्ठ कार्यकर्ता का भावुक पोस्ट वायरल

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भाजपा के एक कार्यकर्ता के दर्द भरे पोस्ट की हो रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के द्वितीय वर्ष शिक्षित और समर्पित परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस नेता ने अपनी ही सरकार के कद्दावर मंत्री की जिद को लेकर बेहद तल्ख और भावुक टिप्पणी की है।

नेता ने लिखा: ''मेरे पिता जी भारतीय जनता पार्टी के ईमानदार कार्यकर्ता रहे हैं, इस बात को सम्माननीया वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) जी भी अच्छे से जानती हैं। मैं खुद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का द्वितीय वर्ष शिक्षित कार्यकर्ता हूं। मैंने अपने जीवन में अनेकों बार भाजपा का जिला प्रमुख और प्रधान बनाने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन आज पहली बार मुझे प्रशासनिक स्तर पर मदद की जरूरत पड़ी, क्योंकि गलती से मैंने अपना प्रमोशन स्वीकार कर लिया था। इसके बदले मुझे 59 साल की उम्र में मेरे घर से 500 किलोमीटर दूर झालावाड़ ट्रांसफर कर दिया गया। दुर्भाग्य यह रहा कि मेरा ट्रांसफर किसी रिक्त स्थान पर भी नहीं किया गया। खैर, मैं तो अब इस नौकरी से वीआरएस (VRS) ले लूंगा। लेकिन माननीय शिक्षा मंत्री जी, आपकी यह जिद्द बीजेपी को लेकर डूबेगी।''

जालोर नगर मंडल के व्हाट्सएप ग्रुप चैट्स लीक

असंतोष की यह चिंगारी केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। पश्चिमी राजस्थान के जालोर जिले से भी भाजपा नगर मंडल के एक आंतरिक व्हाट्सएप ग्रुप के चैट्स लीक होकर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

इन लीक चैट्स में स्थानीय पार्टी पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता अपनी ही सरकार के मंत्रियों और स्थानीय विधायकों के रवैये पर तीखे सवाल उठा रहे हैं।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि आज राज्य में अपनी सरकार बनी है, तो उनकी जायज मांगों और छोटे-मोटे प्रशासनिक कामों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।

ट्रांसफर-पोस्टिंग की विसंगतियां, सरकार के लिए चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राजस्थान में हाल के महीनों में शिक्षा विभाग, पंचायती राज और राजस्व विभाग में जो ताबड़तोड़ तबादले हुए हैं, उनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पार्टी संगठन के फीडबैक को पूरी तरह तवज्जो नहीं मिली है। कई जगहों पर दशकों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं के परिजनों या स्वयं सेवा में लगे नेताओं को सुदूर रेगिस्तानी या सीमावर्ती अंचलों में भेज दिया गया है, जिसे "पनिशमेंट पोस्टिंग" माना जा रहा है।

कार्यकर्ताओं का मानना है कि अधिकारियों के प्रभाव में आकर सरकार के मंत्री बिना सोचे-समझे ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिससे जमीन पर दिन-रात मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है।

सरकार और संगठन में तालमेल की कमी, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार लगातार बेहतर सुशासन और जनसुनवाई के दावे कर रही है। संगठन के स्तर पर भी इस असंतोष को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन डिजिटल युग में कार्यकर्ताओं का यह गुस्सा सोशल मीडिया के जरिए सीधे जनता के सामने आ रहा है।

यदि समय रहते संगठन और सरकार के उच्च स्तर से इन नाराज कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर उनकी जायज समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले स्थानीय निकायों और उप-चुनावों में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम और वायरल पोस्ट्स को लेकर भाजपा के प्रदेश मुख्यालय और मंत्रियों की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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