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Rajasthan Budget 2023: जानिए राजस्थान का पहला बजट क्यों था ‘टैक्स फ्री’

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपना पांचवां और अंतिम बजट दस फरवरी को पेश करेंगे। यह राजस्थान का 71वां बजट होगा।

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपना पांचवां और अंतिम बजट दस फरवरी को पेश करेंगे। यह राजस्थान का 71वां बजट होगा। आजादी के बाद राजस्थान का पहला बजट दिग्गज किसान नेता नाथूराम मिर्धा ने पेश किया था। राजस्थान में मुख्यमंत्री ही बजट पेश करते आ रहे हैं क्योंकि अभी तक के इतिहास में वित्त विभाग मुख्यमंत्री के पास ही रहा है, इसलिए वें ही बजट पढ़ते आ रहे हैं। राजस्थान में पहली विधान सभा का गठन 23 फरवरी 1952 को हुआ था, तब पहले मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल थे। पहले वित्त मंत्री के रूप में मिर्धा ने सरकार का पहला बजट पेश करते हुए कहा था कि इस बजट में मेरे कई भावनाएं हैं। संयुक्त राजस्थान का सपना हम कई युगों से देखते आ रहे हैं। यह मेरा सौभाग्य है कि मंत्रिमंडल का पहला बजट प्रस्तुत करने का सौभाग्य मुझे मिला है।

मिर्धा ने पहले बजट में कोई टैक्स नहीं लगाया गया था। फिर राज्य में सूखा, पेयजल, सिंचाई, कानून व्यवस्था, राज्य के विकास, वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों को शामिल करते हुए बजट बनाया गया। राजस्थान में पहली विधानसभा में 160 सीटें थी, जिसे बाद में 1957 में 176, 1967 में 184 और 1977 में 200 सीटों तक बढ़ाया गया। पहला बजट 4 अप्रैल 1952 को राजस्थान विधानसभा में पेश किया गया था। जो 17.25 करोड़ रुपए का था। यह बजट सूखे से निपटने के साथ कानून व्यवस्था और वित्त प्रबंधन पर फोकस किया गया था।

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आजादी के बाद विधानसभा में राज्य का पहला बजट वित्तीय वर्ष 1952-53 के लिए था। पहला बजट पेश हुए 70 साल हो गए हैं। 70 साल पहले पेश किए गए पहले बजट और मौजूदा बजट में काफी अंतर है, पिछला बजट 2.50 लाख करोड़ का था। मौजूदा दौर में विकास योजनाओं में खर्च के लिए सरकार कर्ज पर ही निर्भर है। साल 2021-22 का बजट 2.50 लाख करोड़ था। इसमें 2 लाख 8 हजार करोड़ रुपये राजस्व व्यय यानी वेतन भत्ते और सरकार के आवर्ती खर्चों के लिए थे। केवल 42 हजार करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय के लिए थे।

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अशोक गहलोत राजस्थान में 10वीं बार बजट पेश करेंगे। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के पास 2023 में 10वां मौका होगा जब गहलोत विधानसभा में बजट पेश करने वाले हैं। गहलोत की पहली सरकार में 1988 से 2003 के बीच वित्त मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने बजट पेश किया था। लेकिन उसके बाद गहलोत 2008 से 2013 और 2018 से अब तक बजट पेश करते रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि गहलोत सीएम होने के साथ-साथ वित्त मंत्री का काम भी देख रहे हैं।