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राजस्थान में उबाल पर ‘पॉलिटिकल टेम्परेचर’, अब गहलोत सरकार पर वसुंधरा-किरोड़ी-बेनीवाल का ‘ट्रिपल अटैक’!

राजस्थान में उबाल पर 'पॉलिटिकल टेम्परेचर', अब गहलोत सरकार पर वसुंधरा-किरोड़ी-बेनीवाल का 'ट्रिपल अटैक'!

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Rajasthan Crop damage compensation Raje Kirodi Beniwal on Gehlot

जयपुर।

राजस्थान में बेमौसम बरसात से हुए फसल खराबे का मुद्दा गरमाया हुआ है। राज्य सरकार ने जहां प्रभावित क्षेत्रों की गिरदावरी करवाकर किसानों को जल्द से जल्द आर्थिक मदद पहुंचाने का दावा किया है तो वहीं इस मुद्दे पर विरोधी दल सड़क से लेकर विधानसभा सदन तक सरकार को घेरने के प्रयास में लगे हैं। इस गतिरोध के बीच प्रदेश का सियासी पारा गर्माया हुआ है।

घोषणाओं के वक्तव्य नहीं, तुरंत राहत दें: वसुंधरा राजे

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने फसल खराबे के मुद्दे पर गहलोत सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने अपनी एक ट्वीट प्रतिक्रिया में कहा कि एक ओर राजस्थान का किसान अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से हुए नुकसान के कारण खून के आंसू पी रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सरकार थोथी घोषणाओं का जश्न मनाने में व्यस्त है।

राजे ने आगे कहा कि ये कितनी पीड़ा की बात है कि फसल खराबे से आहत व कर्जमाफी के वादे से सटाई बूंदी के किसान ने आत्महत्या तक कर ली है। उन्होंने कहा कि सरकार जश्न से बाहर निकले और अन्नदाता के आंसू पोछे। उन्हें घोषणाओं के वक्तव्य नहीं, तुरंत राहत दें।

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संकट की स्थिति में अन्नदाता : हनुमान बेनीवाल

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर राजस्थान में बारिश और ओला वृष्टि से रबी की खड़ी और कटी हुई फसलो की हुई तबाही की तरफ ध्यान आकर्षित किया है। सांसद ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से किसानों की कमर टूट गई है और नागौर सहित राजस्थान के जयपुर,सीकर, दौसा, जोधपुर, बूंदी, अलवर व बाड़मेर व जैसलमेर व कई जिलो में सरसों, चना, जीरा व इसबगोल सहित रबी की अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है। राजस्थान का अन्नदाता संकट की स्थिति में आ गया है।

बेनीवाल ने अपने पत्रों में बूंदी जिले के एक किसान पृथ्वीराज बैरवा द्वारा फसल खराबे के कारण हुए नुकसान से आहत होकर आत्महत्या का ज़िक्र भी किया। उन्होंने लिखा कि ऐसी विकट स्थिति में जब प्राकृतिक आपदा से किसानों को नुकसान हो जाता है तो किसानों को मदद के लिए चुनी हुई सरकारो से बहुत बड़ी अपेक्षा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से केंद्र के स्तर से व मुख्यमंत्री गहलोत को राज्य सरकार के स्तर से किसानों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज जारी करने की मांग की।


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किसानों को जल्द से जल्द राहत दिलाए सरकार: डॉ किरोड़ी मीणा

सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने भी नई दिल्ली स्थित आवास पर स्वास्थ्य लाभ लेने के बीच फसल खराबे पर सरकार से अपील की है। उन्होंने एक ट्वीट प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा, 'प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बारिश एवं ओलावृष्टि के कारण किसान भाइयों की खड़ी फसल को क्षति पहुंचने का समाचार दुखदाई एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य सरकार एवं प्रशासन जल्द नुकसान की गिरदावरी करवाकर हमारे किसान भाइयों को उचित मुआवजा प्रदान करें, जिससे उन्हें राहत मिल सके।

राज्य सरकार निभाए अपना युगधर्म : सतीश पूनिया
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने कहा है कि इतनी तीव्रता के साथ ओलावृष्टि हुई है कि फसल पूरे तरीके से नष्ट हो चुकी हैं और किसान भाइयों को भारी नुकसान हुआ है।कई गांवों में ओलावृष्टि से जीती जागती फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से कई किसानों के पशुओं की भी मौत भी हुई है। राज्य सरकार का युगधर्म है कि फसलों और पशुओं को हुए नुकसान का आंकलन करवाकर जितनी जल्दी हो सके किसानों को मुआवजा राशि देना सुनिश्चित करे।

इधर राज्य सरकार का ये आया जवाब
कृषि मंत्री श्री लालचन्द कटारिया ने बताया कि किसानों के नुकसान के आंकलन की गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करने, प्राकृतिक आपदा राहत कोष से मुआवजा दिलवाने, प्रधानमंत्री फसल बीमा सहित किसानों के व्यक्तिगत फसल बीमा एवं अन्य मदों से राहत दिलाने के लिए प्रदेश सरकार कटिबद्ध है।

कृषि मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित फसल के नुकसान होने पर कृषक द्वारा 72 घंटों के भीतर बीमा कंपनी, कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारी, राजस्व विभाग के अधिकारी, राज किसान सुविधा ऐप और कंपनी के हेल्पलाईन नम्बरों पर सूचना देना आवश्यक है। खेत में कटी हुई फसल को नुकसान होने पर 14 दिवस की अवधि के लिए बीमा कवर उपलब्ध है।

कृषि मंत्री ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण फसलों के नुकसान का खतरा अभी टला नहीं है, इसलिए किसानों को बारिश और ओलावृष्टि से सावधान रहने की जरूरत है। कटारिया ने कहा कि पिछले 4 वर्षों में राज्य सरकार द्वारा लगभग एक करोड़ 90 लाख फसल बीमाधारक किसानों को 18 हजार 500 करोड़ रूपये का फसल बीमा क्लेम वितरित किया जा चुका है।