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रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है देसी बेर, कई बीमारियों में फायदेमंद

उदयपुरवाटी पहाड़ी क्षेत्र का देसी बेर सर्दी का फल माना जाता है। वहीं इसे साल भर दवा के रूप में भी काम में लिया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार सूखे बेर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर हैं।

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जयपुर/पचलंगी (झुंझुनूं )। उदयपुरवाटी पहाड़ी क्षेत्र का देसी बेर सर्दी का फल माना जाता है। वहीं इसे साल भर दवा के रूप में भी काम में लिया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार सूखे बेर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर हैं। यही कारण है कि पहाड़ी क्षेत्र में झाडि़यों पर लगने वाला यह बेर किसानों की आमदनी का जरिया बना है। आस-पास की मंड़ियों में इसकी खासी डिमांड रहती है। वहीं प्रवासियों की भी यह बेर काफी पसंद आते हैं।

चिकित्सकों ने यह बताए बेर खाने के फायदे
आयुष चिकित्सक डॉ. युगावतार शर्मा के अनुसार मौसम परिवर्तन के साथ होने वाली बीमारी से बचने के लिए सूखे व ताजा बेर का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उन्होंने बताया कि बेर पाइल्स, सिर दर्द, नकसीर आना, बवासीर, उल्टी दस्त व मुंह में छालों के लिए दवा का काम करते हैं।

आयुष चिकित्सक डाॅ. नीरज सैनी के अनुसार पहाड़ी क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले देसी बेर को ताजा या सूखे किसी भी रूप में सेवन करने से अनिद्रा, मन अशांत जैसे रोगों से फायदा मिलता है। उन्होंने बताया कि बेर की चाय पीने से कब्ज, अनिद्रा जैसे रोगों में फायदा होता है। यह बेर कैंसर की कोशिकाओं को बढने से भी बचाता है। इसी तरह डॉ. कमलेश शर्मा ने बताया कि बेर के सेवन से पाचन तंत्र ठीक रहता है।

देसी बेर का यहां होता है उत्पादन
उदयपुरवाटी पहाड़ी क्षेत्र के पचलंगी , काटलीपुरा, बाघोली, जहाज, मणकसास, मावता, कैरोठ सहित अन्य गांवों में देसी बेर की खूब पैदावार होती है। इनकी नीमकाथाना, श्रीमोधापुर, कोटपुतली, चौमू, उदयपुरवाटी व सीकर की मंडियों में मांग रहती है। बेर का सीजन शुरू होते ही लोग अपने रिश्तेदारों को भी उपहार स्वरुप बेर भेजते हैं।

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इन राज्यों में लेकर जाते हैं प्रवासी
कोलकता, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में रहने वाले प्रवासियों तक भी यहां के बेर पहुंचते हैं। खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी, शाकंभरी माता सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर आने वाले प्रवासी यहां से कैर, सांगरी के साथ सूखे बेर भी खरीद कर ले जाते हैं।