
Rajasthan Economy: राजस्थान की अर्थव्यवस्था को तेजी से दूसरे प्रदेशों से आगे ले जाने के लिए ग्राउंड वर्क शुरू हो गया है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था 350 बिलियन डॉलर (29,230 लाख करोड़ रुपए) पहुंचाने के लिए 5 साल में इसे करीब 11,500 लाख करोड़ रुपए बढ़ाने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में गठित राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (रीति) ने विकसित राजस्थान-2047 का विजन डॉक्यूमेंट तैयारी शुरू कर दी है। लगातार मॉनिटरिंग के लिए वर्ष 2030 और 2047 के लिए भी लक्ष्य तय किए जाएंगे।
रीति ने सभी विभागों से दीर्घकालिक योजना मांगी है, जिसकी तैयारी के लिए विभाग भी अपना विजन डॉक्यूमेंट बना रहे हैं। अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक ले जाने के लिए नए मिशन, नई नीतियां और 9 से 11 दिसम्बर तक प्रस्तावित राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के लिए काम शुरु हो गया है।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था करीब 17 प्रतिशत वृद्धि के साथ मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक 17.81 लाख करोड़़ रुपए पहुंचने का अनुमान है। इसे आने वाले पांच वर्ष में 29,230.26 लाख करोड़ रुपए पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है।
लॉजिस्टिक पॉलिसी- डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रूट मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित होगा।
एक जिला-एक उत्पाद व निर्यात प्रोत्साहन नीति- स्थानीय उत्पादों के जरिए हर जिले को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास होगा।
एमएसएमई नीति- इंटीग्रेटेड क्लस्टर डवलपमेंट व वन स्टॉप शॉप समाधान का लक्ष्य लेकर काम किया जाएगा। एमएसएमई कॉनक्लेव भी होगा।
औद्योगिक नीति- डेटा सेंटर डवलपमेंट के साथ ही गुजरात की तरह निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रयास होगा। इसके अलावा उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित व स्किल्ड कर्मचारी उपलब्ध कराने की तैयारी होगी।
एग्रो प्रोसेसिंग नीति- किसानों की आय और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र को गांवों और कस्बों तक ले जाने का प्रयास होगा।
उत्तरप्रदेश की तरह 2030 तक अर्थव्यवस्था एक ट्रिलियन तक ले जा सकते हैं। यूपी के पास गंगा और श्रमिक ही हैं, हमारे पास लीथियम, यूरेनियम व सोने जैसे कई मिनरल्स के भंडार हैं। 16-17 मिनरल्स पर तो एकाधिकार है। हम ऊर्जा सेक्टर में नंबर-1 बन सकते हैं। ईआरसीपी से खाद्यान्न व एमएसएमई सेक्टर में बूम आएगा। मिलेट्स के लिए ओडिशा मॉडल से निर्यात बढ़ा सकते हैं।
पर्यटन, पशुपालन व रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में काफी संभावना है। एमएसएमई नीति पारदर्शी बनाएं। विकास के लिए सेवानिवृत्त ब्यूरोक्रेट्स के बजाय कॉरपोरेट, एकेडमिशियन और कृषि से जुडे़ लोगों का टास्क फोर्स बने और इकॉनोमिक ग्रोथ के लिए अलग सेल बने। सतत विकास के लिए पैरामीटर तय हों। इस तरह रोडमैप तय कर प्रदेश को देश में नंबर-1 बना सकते हैं। - प्रो. एस एस सोमरा, अर्थशास्त्री
Published on:
16 Sept 2024 07:39 am
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