
सुरेश व्यास/बीकानेर। अक्षय तृतीया पर अपने स्थापना दिवस के दिन पतंगों से अटे आसमान के बीच 'बोई काट्या है...' की आवाजों से गुंजायमान रहने वाले वाले प्रदेश के चौथे बड़े शहर बीकानेर की पश्चिम विधानसभा सीट जातिवाद के पेंच लड़ा रही है। ये पेंच भी ऐसा उलझा है कि ऊंट किस करवट बैठेगा, अंदाज लगाना मुश्किल है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष व पांच बार विधायक रहे चुके डॉ. बुलाकीदास कल्ला आखिरी क्षणों में टिकट तो ले आए, लेकिन इसके बाद बने हालातों ने उन्हें जातिगत समीकरणों में उलझा रखा है। उनका मुकाबला उनके बहनोई व विधानसभा पहुंचने की हैटट्रिक लगाने की तैयारी कर रहे मौजूदा भाजपा विधायक गोपाल जोशी से है। हालांकि कांग्रेस के बागी गोपाल गहलोत समेत 12 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला कल्ला व जोशी के बीच ही माना जा रहा है, लेकिन पंतग उड़ा कर स्थापना दिवस मनाने वाले बीकाणा की इस सीट पर कांग्रेस के टिकट के लिए लड़ाए गए पेच की ढील और तान दोनों ही प्रत्याशियों को प्रभावित कर रही है।
जातियों के शोर में दब गए मुद्दे
आमतौर पर बीकानेर के लोगों को शांत व ठंडी तासीर का माना जाता है। यहां बरसों से लोग रेलवे फाटकों की समस्या से जूझ रहे हैं। सीवरेज का अभाव है। अब भी खुली नालियां और टूटी-फूटी सड़कें हैं। संकड़ी गलियों में टूटी सड़कों से उड़ती धूल परेशान करती है, लेकिन यहां के लोगों ने कभी कोई आंदोलन नहीं किया। लेकिन पहली बार यहां के लोगों को किसी नेता को टिकट न मिलने या टिकट कटने पर सड़कों पर उतरते हुए देखा गया।
टिकट के झगड़े में तीन प्रमुख जातियां सड़कों पर उतरी और इससे पैदा हुई खटास ने चुनाव को जातिवाद के जहर में उलझा दिया है। इस चक्कर में शहर की जनसमस्याओं की कहीं चर्चा ही नहीं है। चर्चा है तो यही कि कौन किस पर भारी पड़ेगा। लोगों के अपने अपने तर्क हैं,लेकिन अपनी सपाट प्रतिक्रिया देने वाले पाटों पर भी सीधा जवाब नहीं मिल पा रहा है।
यूं उलझे सियासी पेच
कल्ला को लगातार दो बार चुनाव हारने के कारण टिकट नहीं मिल पा रहा था। कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष यशपाल गहलोत को बीकानेर पश्चिम से मैदान में उतार दिया। इसके साथ ही कल्ला को टिकट मिलने के रास्ते लगभग बंद हो गए तो सर्वाधिक मतदाताओं वाले ब्राह्मण समुदाय का एक धड़ा नाराज होकर सड़कों पर उतर आया। कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नारेबाजी हुई।
बात दिल्ली तक पहुंची तो कांग्रेस ने कल्ला को टिकट देकर गहलोत को बीकानेर पूर्व की सीट पर शिफ्ट कर दिया। इससे अपनी सीट सुरक्षित करने में लगे नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी की कांग्रेस में आए कन्हैयालाल झंवर को टिकट दिलाने की मंशा पर पानी फिर गया।
झंवर को टिकट नहीं मिलने से नाराज डूडी ने चुनाव नहीं लड़ने की धमकी तक दे डाली। फिर कांग्रेस आलाकमान ने यशपाल गहलोत का टिकट काटकर झंवर को टिकट थमाया तो माली समाज के यशपाल समर्थक नाराज हुए।
आक्रोशित लोगों ने तोड़फोड़ की और 10-12 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो गए। यशपाल हालांकि कल्ला के ही नजदीकी माने जाते हैं, लेकिन टिकट कटने का ठीकरा कल्ला के सिर पर फूटा। कुछ इलाकों में कल्ला के खिलाफ पैम्पलेट वार भी हुआ। इधर, झंवर के टिकट पर संकट के लिए डूडी समर्थक कल्ला को जिम्मेदार ठहराते रहे। हालांकि बाद में यशपाल मान गए, लेकिन ये स्थितियां कल्ला के लिए चुनौती बनी हुई नजर आ रही हैं।
ये हैं जातिगत समीकरण
चुनावी किस्मत आजमा रहे कल्ला व जोशी न सिर्फ स्वजातीय बल्कि आपस में निकट के रिश्तेदार भी हैं। जोशी की पत्नी कल्ला की फुफेरी बहन हैं। बीकानेर पश्चिम में लगभग 60 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं। ऐसे में जिसे इस जाति के ज्यादा वोट झटकने वाला प्रत्याशी अपनी राह आसान कर लेता है। इसके अलावा सीट पर लगभग 20 हजार मुस्लिम, बीस बीस हजार माली व दलित व 15 हजार जाट मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
कैंची काटेगी तो सही
बीकानेर (पश्चिम) से कांग्रेस के बागी प्रत्याशी गोपाल गहलोत मैदान में हैं। हालांकि उनकी बगावत से त्रिकोणात्मक संघर्ष की स्थिति तो नहीं बन रही, लेकिन गहलोत के समर्थकों का नारा जरूर लोगों को लुभा रहा है।
कोटगेट इलाके में गहलोत के पक्ष में जनसम्पर्क कर रहे समर्थकों का नारा 'कैंची धड़ाधड़ चालसी, गोपाळ बाजी मारसी' तो भीड़भाड़ वाले बाजार से गुजर रहे लोग भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके। दरअसल, कैंची गोपाल गहलोत का चुनाव चिह्न है और वे बीकानेर पश्चिम के साथ बीकानेर पूर्व से भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। उनके चुनाव चिह्न पर चुटकी लेते हुए मोहता चौक के एक युवा ने कहा कि कैंची वोट भी काटेगी। इसका खतरा दोनों ही दलों के प्रत्याशियों को है।
चेतन धूणों से ज्यादा चुनावी सरगर्मी
बीकानेर संस्कृति में रचा बसा ऐतिहासिक शहर है। यहां हर मौसम भी उत्सव है। शीत ऋतु में चेतन धूणों की परम्परा है। शरद पूर्णिमा के बाद से परकोटे में बसे शहर के चौक-पाचों पर धूणे चेतन हो जाते हैं। आमतौर पर जिन्हें हम अलाव कहते हैं, यहां के लोग उसे चेतन धूणा कहकर पुकारते हैं। पाटों पर धूणा चेतन होने का मतलब होता है सर्दी आ गई। लोग लोहे की तगारी में अलाव जलाकर चारों ओर बैठकर ताश खेलते हैं या चर्चाएं करते हैं। पाटों पर धूणों से ज्यादा चुनाव की सरगर्मी है।
बारह गुवाड़ के पाटे पर बैठे रतना महाराज कहते हैं कि लोग यहां चुनाव को भी उत्सव के रूप में लेते हैं। माहौल किसका है, पूछने पर कहते हैं टक्कर कांटे की है। वहीं अनारक्षित समाज पार्टी से चुनाव लड़ रहे शिक्षक नेता शिवशंकर ओझा मिल गए।कहने लगे कांग्रेस-भाजपा दोनों ने युवाओं की नौकरियों पर आरक्षण के चलते संकट खड़ा कर रखा है।
युवा दोनों ही दलों के खिलाफ है। जस्सूसर गेट में चाय की पट्टी पर बैठे युवा कांग्रेस-भाजपा के प्रत्याशियों को ब्राह्मण वोटों की गणित पर कयास लगाते दिखे। हमनें पूछा तो पहले सकपकाए, फिर बोले टिकट को लेकर मचा बवाल वोटों में कन्वर्ट होता है या नहीं, फैसला इसी पर निर्भर करेगा।
नत्थूसर गेट पर रात साढ़े 12 बजे भी रौनक और हर समूह सिर्फ चुनावी चर्चा करता दिखा। वहां 'फैर आयग्यो बीडी कल्लो...' नारे पर रोचक बहस सुनाई दी। वहां पान की दुकान पर खड़े भंवरलाल कहने लगे कल्ला के लिए आस पास के लोगों पर काबू रखना भी कम चुनौती नहीं है, लेकिन पास ही खड़े सदन पुष्करण कहने लगे कि जोशी नै भी दस साल रौ हिसाब देणो पड़सी...।
मोहता चौक, आचार्यों चौक, रताणी व्यासों का चौक, डागा चौक व दमाणी चौक जैसे इलाके भी चुनावी चर्चाओं में मशगूल नजर आए। लोग कांटे की टक्कर बता रहे हैं और कह रहे हैं कि हार जीत का आंकड़ा बड़ा होना मुश्किल है।
स्टार प्रचारकों से दूरी
दोनों ही दलों के स्टार प्रचारकों का बीकानेर पश्चिम में पगफेरा नहीं के बराबर हुआ है। दोनों प्रत्याशी अपने ही बल पर प्रचार में लगे हैं। नामांकन दाखिल होने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जरूर यहां रोड शो किया। नामांकन से पहले हालांकि यहां काग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की संकल्प रैली हुई थी। इसके बाद कांग्रेस का कोई बड़ा नेता इस क्षेत्र में सभा या प्रचार करने नहीं आया है। भाजपा की ओर से भी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे या किसी अन्य बड़े नेता की सभा या रैली नामांकन के बाद नहीं हुई है।
जीत का गणित
प्रत्याशियों के मन में भी हार-जीत को लेकर धुकधुकी है। बीकानेर पश्चिम से पांच बार विधायक रह चुके डॉ. बीडी कल्ला कहते हैं कि मौजूदा भाजपा विधायक और इस बार के चुनाव में उनके प्रतिद्वन्द्वी गोपाल जोशी के खिलाफ दस साल की इन्कमबेंसी और लोगों में उनके प्रति सहानुभूति जीत का आधार बनेगी। वे आरोप लगाते हैं कि पिछले दस साल में विकास होना तो दूर उनके विधायक रहते शुरू हुई विकास की रफ्तार को भी कुंद कर दिया गया।
जनता उन्हें ही वोट क्यों दे, पूछने पर कल्ला कहते हैं कि वे विकास के पर्याय हैं। उनके कार्यकाल में बीकानेर में 5 विश्वविद्यालय व 4 इंजीनियरिंग कॉलेज आए। मेडिकल कॉलेज में 100 सीटों का इजाफा हुआ। बज्जू लिफ्ट केनाल का काम हुआ।
एलिवेटेड रोड के लिए परियोजना उन्होंने मंजूर करवा दी। भूमि अधिग्रहण होना था, लेकिन उनके हारने के बाद परियोजना को लटका दिया गया। रेलवे फाटकों की समस्या का समाधान नहीं हुआ। लोग अब विकास चाहते हैं।
भाजपा प्रत्याशी गोपाल जोशी कहते हैं कि उन्होंने शिक्षा, अस्पताल व सड़क-सीवरेज के लिए नियोजित रूप से काम किया। पांच साल में 11 करोड़ रुपए जनसुविधाओं और जरूरतों के हिसाब से खर्च किए। हालांकि वे मानते हैं कि शहर की यातायात की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
कभी जनता नहीं समझती और कभी सरकार नहीं समझती। दोनों के समन्वय के बिना समाधान संभव नहीं है। यह पूछने पर लोग आपको ही वोट क्यों दें, तो जोशी कहते हैं उन्होंने किसी का बुरा नहीं किया। वे झूठा वादा नहीं करते, किसी को झांसा नहीं देते। न गिफ्ट लेते हैं और न गिफ्ट देते हैं।उनकी खुली किताब है। लोग इसे पसंद भी करते हैं।
मतदाताओं का गणित
कुल मतदाता - 2,08,039
पुरुष- 1,08,266
महिला- 99, 773
कुल मतदान केंद्र 184
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पिछला चुनाव
कुल मतदाता- 1,74,952
कुल मतदान 1,30,731 (74.72%)
भाजपा को मिले मत- 49.8 प्रतिशत
कांग्रेस को मिले मत- 44.9 प्रतिशत
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2013 चुनाव का नतीजा
गोपाल जोशी (भाजपा)- 65,129 (51%)
डॉ. बीडी कल्ला (कांग्रेस)- 58,705 (46%)
2008 चुनाव का नतीजा
गोपाल जोशी (भाजपा)- 56,572 (55%)
डॉ. बीडी कल्ला (कांग्रेस)- 37,711 (36%)
Published on:
30 Nov 2018 04:48 pm
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