
जयपुर।
राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले जातीय हिंसा भड़काने की बड़ी साजिश नाकाम हो गई है। चुनावी माहौल में जातीय हिंसा फैलाने के बड़े नेटवर्क का भड़ाफोड़ करते हुए पुलिस ने कई खुलासे किये हैं। दरअसल, बिते दिनों जयपुर में राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में मनु की मूर्ती पर कालिख पोतने के मामले में पड़ताल में जुटी पुलिस के सामने ये चौंकाने वाली बात सामने आई है।
जयपुर की अशोकनगर थाना पुलिस ने हाईकोर्ट परिसर स्थित मनु की मूर्ति पर काला रंग छिड़कने के मामले में मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया। इसके बाद जब उससे पूछताछ हुई तो पुलिस के भी रौंगटे खड़े हो गए। गिरफ्त में आये मास्टरमाइंड ने कबूल किया कि उसकी अगुवाई में एक गिरोह प्रदेश में सक्रीय होकर चुनाव से पहले माहौल बिगाड़ने की साजिश पर काम कर रहा था। पुलिस का भी दावा है कि चुनाव के मद्देनजर जातीय हिंसा फैलाने की साजिश के तहत मनु की मूर्ती पर कालिख पोतने के घटनाक्रम को अंजाम दिया गया।
अशोक नगर एसीपी दिनेश शर्मा के अनुसार महाराष्ट्र के आजादनगर निवासी मास्टरमाइंड मोहम्मद अब्दुल शेख दाउद को गिरफ्तार किया गया है। प्रतिमा पर काला रंग छिड़कने वाली औरंगाबाद निवासी कांता और शीला को सोमवार को मौके से ही पकड़ लिया गया था। रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के नाम पर महाराष्ट्र से इन दोनों महिलाओं सहित करीब 6 लोगों को मास्टरमाइंड शेख ही घटना से एक दिन पहले जयपुर लाया था। यहां उन्हें लग्जरी होटल में ठहराया था। इनमें दोनों महिलाओं के अलावा महाराष्ट्र निवासी सचिन, कपिल, रोहित और योगेश शामिल थे।
होटल की ऑनलाइन बुकिंग की गई थी। होटल में ठहरने और रेल का भाड़ा शेख ने ही दिया था। कांता और शीला औरंगाबाद में मजदूरी करती हैं। पुलिस अब अन्य 4 आरोपियों को नामजद कर उन्हें तलाश रही है। एसीपी ने दावा किया कि राज्य में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जातीय द्वेष फैलाने के लिए उक्त साजिश शेख ने ही रची थी। उसने मूर्ति पर काला रंग छिड़कने के दौरान मोबाइल फोन से घटनाक्रम के वीडियो भी बनाए थे। वीडियो शेख ने कहां-कहां भेजे, इसकी जांच की जा रही है।
मिली आपत्तिजनक सामग्री
पुलिस को शेख के पास विदेशों से फंड मिलने के दस्तावेजों सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली है। उससे बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
फ़िल्मी स्टाइल से पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी
हाईकोर्ट में मनु की मूर्ति पर काला रंग फेंकने के मामले में पुलिस ने आरोपी महिलाओं के साथी को चलती ट्रेन में फिल्मी अंदाज में पकड़ा। तब से ही पुलिस पूरे मामले को किसी बड़ी साजिश का हिस्सा मानते हुए आरोपी से पूछताछ के आधार पर खुलासा करने में जुटी रही।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद अब्दुल शेख दाउद (30) आजादनगर, धुले महाराष्ट्र निवासी है और पुणे के नेता सचिन खराद के संगठन में अल्पसंख्यक मंडल का अध्यक्ष है। आरोपी महिलाओं के गिरफ्तारी की जानकारी होने पर वह दोपहर सवा बारह बजे वाली बांद्रा एक्सप्रेस से मुंबई लौट रहा था। आरोपी के सीसीटीवी फुटेज मिलने के बाद जानकारी जुटाई तो पता चला कि उसका स्लीपर कोच में टिकट बुक है। इसके बाद ज्योतिनगर के वीरेंद्र कुरील, अशोकनगर के महिपाल और महेशनगर से अरुण पूनिया सिविल ड्रेस में ट्रेन के एक-एक डिब्बे में चढ़ गए और आरोपी की तस्वीर लेकर संदिग्ध लोगों से हुलिया मिलाते रहे।
आखिर में एक कोच में आरोपी के हुलिए वाला व्यक्ति दिखने पर इंस्पेक्टर वीरेंद्र ने पहले सभी साथियों को इशारा कर उसे घेरा और फिर उसे चाकसू स्टेशन पर उतार लिया।
ऐसे दिया था घटनाक्रम को अंजाम
दोपहर करीब साढ़े बारह बजे अचानक दो महिलाएं आई और इनमें से एक महिला दूसरे के कंधों पर चढ़कर मूर्ति पर काला रंग स्प्रे करने लगी। यह देखकर हाईकोर्ट परिसर में हंगामा हो गया और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी चिल्लाया। सुरक्षाकर्मी ने तुरन्त महिला सुरक्षाकर्मियों को बुलाया और दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया।
हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से इस बारे में अशोक नगर थाने में मामला दर्ज किया गया। सामने आया कि इन महिलाओं ने मनु के प्रति अपनी नफरत जाहिर करने के लिए काले रंग का स्प्रे किया। पुलिस कार्रवाई के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने मूर्ति पर लगाया गया काला रंग साफ करवा दिया। इस घटना के बाद हाईकोर्ट परिसर में पुलिस की सतर्कता बढ़ा दी गई।
हाईकोर्ट प्रशासन में सुरक्षा की उठी मांग
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष अनिल उपमन व महासचिव संगीता शर्मा ने हाईकोर्ट प्रशासन से परिसर की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबन्द करने तथा पुलिस से इस घटना को गंभीरता से लेते हुए गिरफ्तार महिलाओं को स्थानीय व राष्ट्रीय कनेक्शन तलाशने की मांग की है।
पहले भी मिली धमकियां
मनु की मूर्ति को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है। करीब 29 साल से हाईकोर्ट में याचिका लम्बित है, वहीं पिछले दिनों इस प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने जाने की धमकियां भी मिली थी। इन धमकियों के बाद यहां सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
न्यायिक अधिकारियों के सहयोग से लगी थी प्रतिमा
हाईकोर्ट परिसर में 1989 में राजस्थान उच्चतर न्यायिक अधिकारी एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष पी के जैन ने हाईकोर्ट प्रशासन की अनुमति के बाद लॉयन्स क्लब के सहयोग से यह मूर्ति लगवाई थी। 28 जुलाई 1989 को हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने इसे हटाने का निर्णय किया। इसी बीच आचार्य धर्मेन्द्र व धर्मपाल आर्य ने मूर्ति को हटाने से रोकने को याचिका दायर की, जिस पर सितम्बर 1989 में न्यायाधीश एम बी शर्मा की बेंच ने मामला वृहदपीठ को भेज दिया और निर्णय होने तक मूर्ति को हटाने पर रोक लगा दी। इसके बाद 2015 में हाईकोर्ट ने इस मामले में केन्द्र सरकार को पक्षकार बनवाया और बाद में सुनवाई नहीं हो पाई है।
Published on:
10 Oct 2018 01:29 pm
