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Rajasthan Election 2018: मेट्रो में सफर कर टटोला मतदाताओं का मन, जनता नहीं खोल रही पत्ते

इससे खिलाड़ी तय ही नहीं कर पा रहे हैं कौनसी बॉल किसके पाले में आएगी।
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jaipur metro

जयपुर मेट्रो से मनोज कुमार शर्मा

विधानसभा चुनाव के मैदान में प्रदेशभर के राजनीतिक खिलाड़ी उतर चुके हैं, मगर मतदाता अब भी गुगली फेंक रहे हैं। इससे खिलाड़ी तय ही नहीं कर पा रहे हैं कौनसी बॉल किसके पाले में आएगी। मैं शनिवार को चुनावी हाल जानने जयपुर मेट्रो में जनता के बीच पहुंचा तो यह स्थिति सामने आई। इसके लिए मैं सबसे पहले मानसरोवर मेट्रो स्टेशन पहुंचा और पूछते-पूछते टिकट खिड़की तक गया। यहां से 17 रुपए देकर चांदपोल के लिए टिकट ली और प्लेटफॉर्म तक पहुंचा। वहां मेट्रो ट्रेन देखते ही मन में विचार आया कि सबसे पहले इसके पायलट से मिला जाए। जैसे ही दरवाजा खटखटाया तो एक महिला निकलकर आईं।

मुझे लगा कोई पुरूष होगा, मगर में महिला को देखकर चौंका और मन ही मन खुश भी हुआ कि मेट्रो की कमान भी 'नारी शक्ति' के हाथों में हैं। मैंने नाम पूछा तो उन्होंने रेणु बताया। मैने कहा मैडम आप मेट्रो चलातीं हैं, प्रदेशभर में चुनावी माहौल है कभी इसपर भी आपका ध्यान जाता है... तो उन्होंने कहा- मैं अलवर की रहने वाली हूं और मेरा वोट भी वहीं पर लगता है, इसलिए जयपुर की राजनीति पर ज्यादा ध्यान नहीं देती हूं।

हां मगर अलवर वोट डालने जाऊंगी, ऐसा कहकर वो वापस ड्राइविंग सीट पर बैठ गईं। इसके बाद मेट्रो के चलने और गेट के पास से हटने का संदेश चलने लगा तो मैं कोच के अंदर घुसा और सीट पर बैठ गया।

कुछ सेकंड में ही मेट्रो मानसरोवर से चल पड़ी। सीट पर पास में बैठे किशन चौधरी को अपना परिचय देकर पूछा कि आप इस बार किस पार्टी की सरकार बनवा रहे हैं तो उनके साथी मोतीराम कुमावत ने तपाक से एक पार्टी का नाम लिया। मैंने कहा- समर्थक हो क्या...पहले तो वह हिचके फिर गर्दन हिलाते हुए बोले हां। मैंने कहा सच बताइए, फिर बोले मुझे पहले लग रहा था कि सरकार कोई और पार्टी बना रही है, मगर अब टिकट बंटवारे के बाद कुछ बदलाव हुआ है।

वोट किसे देना है अभी तय नहीं किया
इसके बाद दूसरी बोगी में मानसरोवर से चांदपोल जा रहे राजेश कालोया और दीपक कालोया से बात की तो ऐसी ही स्थिति उन्होंने बताई। उनका भी यही कहना था कि टिकट वितरण के बाद कहीं ना कहीं लोगों में नाराजगी बढ़ी है। इतने में पास ही बैठे जमवारामगढ़ के रामप्रसाद मीणा बोले- किसको टिकट मिलता है, इस जनता पर बड़ा असर होता है। एक पार्टी के वर्तमान विधायक का टिकट कटने के बाद सारा गणित गड़बड़ा गया है। नया प्रत्याशी युवा होने और जमवारामगढ़ मुख्यालय का होने के कारण परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं। इतने में मेट्रो चांदपोल पर पहुंच गई। सवारियां वोट किसे देना है इसपर मंथन करते हुए अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ गईं।

मेरी बाइक मानसरोवर में ही खड़ी थी तो फिर से मानसरोवर की टिकट लेकर मेट्रो में सवार हो गया। इस सफर में सवाईमाधोपुर के हरिकेश और शिवराज मिल गए जो किसी काम से राजधानी आए थे। उनसे जब चुनावी चर्चा शुरू की तो उन्होंने अपने वर्तमान विधायक का टिकट कटने का असफोस जताया।

फिर बोले- हमारे यहां दीयाकुमारी को फिर से टिकट मिलना चाहिए था, अगर वो टक्कर में होती तो हम जरूर जिताते। यह साफ कह नहीं सकते कि कौन जीतेगा। मैंने पूछा दीयाकुमारी तो जयपुर रहतीं..फिर भी आप उन्हें ही क्यों लाना चाहते हो। इस पर हरिकेश ने कहा आप कभी वहां आकर देखना, फिर ऐसा सवाल नहीं करोगो।


जनता बोली कुछ भी कहना जल्दबाजी
इसके बाद दिल्ली से आए धनपाल से बात हुई तो उसने कहा नौकरी ही दिल्ली में है तो यहां तो महीने में एक-दो बार आना होता है। इसलिए राजनीति में ज्यादा ध्यान नहीं देता, हां मगर अभी कुछ भी तय नहीं किया है कि वोट किसे देना है। पहले किसी के लिए भी कुछ कहना बेमानी होगा। सारे समीकरण देखकर लगता नहीं है कि किसी की पूर्ण बहुमत मिलेगा। अभी समय है और इसका फैसला मैं ऐन वक्त पर करूंगा।