
अनंत मिश्रा/जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा से विधानसभा के लिए एक अदद टिकट पाना कितना मुश्किल है, ये दावेदार ही बता सकता हैं। एक टिकट पाने के लिए दावेदारों को कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं। जयपुर से लेकर दिल्ली दरबार में नेताओं के हाजिरी लगानी पड़ती है। कार्यकर्ताओं की मान-मनुहार करनी पड़ती है। देवी - देवताओं के यहां ढोक लगानी पड़ती है। फिर भी टिकट मिलने की गारंटी नहीं है। अनेक नेता हैं जिन्हें एक बार टिकट मिल जाती है, लेकिन अगली बार कट जाती है।
एक तरफ जहां चुनावी टिकट की कोई गारंटी नहीं है, वहीं प्रदेश की राजनीति में दो नेता ऐसे भी हैं जो एक सीट और एक ही पार्टी से दसवीं बार टिकट पाने में कामयाब रहे हैं। शिव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस टिकट पर अमीन खान हैं तो दूसरी तरफ बीकानेर पश्चिम सीट से बुलाकीदास कल्ला। 2003 तक कल्ला की सीट बीकानेर रही है जो परिसीमन के बाद बीकानेर पश्चिम हो गई थी। दोनों नेताओं के क्षेत्र में कई दावेदार ताल ठोक रहे थे। बावजूद इसके आलाकमान ने इन दोनों को अपने-अपने क्षेत्रों से दसवीं बार टिकट देने का दांव खेल ही दिया। कल्ला नौ बार चुनाव लड़कर 6 बार जीते हैं वहीं अमीन के खाते में पांच जीत दर्ज हुई हैं।
नारायण सिंह भी एक सीट, एक पार्टी से 10 बार लड़े
कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे नारायण सिंह भी ऐसे राजनेताओं में शुमार हैं जिन्हें एक ही पार्टी और एक ही सीट से 10 बार चुनाव लड़ने का मौका मिला। वे 1972 से 2013 तक दांतारामगढ़ सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े।
शेखावत 11 बार, जोशी 10 बार लगातार
पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत और हरिदेव जोशी भी ऐसे राजनेता थे जो 1952 के पहले चुनाव से लेकर लगातार मैदान में डटे रहे। शेखावत जहां 1952 से लेकर 1998 तक सभी 11 बार मुकाबले में उतरे, वहीं जोशी 1952 से लेकर 1993 तक 10 बार चुनाव लड़े। शेखावत ने जहां आठ अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा, वहीं जोशी डूंगरपुर, घाटोल और बांसवाड़ा सीट से चुनावी रण में उतरे।
Published on:
08 Nov 2023 03:35 pm
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