
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023
जयपुर. राजस्थान के चुनावी रण का प्रचार जोरों पर है। जीत के लिए प्रत्याशी मुद्दों से ज्यादा इमोशनल और भावनात्मक अपील से मतदाताओं के रिझाने की जुगत में लगे हैं। इसके लिए स्थानीय बोली में गीत तैयार कराए गए हैं। नेताजी खुद इनको दर्द भरे अंदाज में लोगों को सुनाते हैं और स्पीकर से आमजन को भी सुनवाते हैं।
भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के कई प्रत्याशी इन इमोशनल ट्रंपकार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते चुनाव में लोक कलाकारों को भी बल्ल-बल्ले है। जब प्रत्याशी प्रचार के लिए किसी क्षेत्र में जाते हैं तो उनकी जिंदगी के दर्द पर आधारित गीत लोगों को सुनाए जाते हैं। ऐसे गीतों की चर्चा लोगों के बीच खूब है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि प्रत्याशी असल मुद्दों से ध्यान हटाने को ऐसा कर रहे हैं।
थारा पग पकड़ूं माधोपुर...
त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी सवाई माधोपुर सीट से भाजपा प्रत्याशी किरोड़ीलाल मीना और निर्दलीय प्रत्याशी आशा मीना के प्रचार में गीतों से माध्यम से अपील की जा रही है। भाजपा प्रत्याशी के प्रचार में ‘ थारा पग पकड़ूं माधोपुर राखो लाज बुढ़ापा की...?’ ‘झोली भर दीजो बाबा की, पहले ही गोद खाली है’...जैसे गीतों से मतदाताओं को रिझाने का प्रयास किया जा रहा है।
टाइगर जीको ध्यान रखनो
हिंडोली में कांग्रेस कार्यकर्ता हाड़ौती बोली के गीतों के जरिए मतदाताओं को लुभाने रहे हैं। यहां ’हिंडोली को टाइगर जीको ध्यान रखनो छ:, 25 तारीख न भायाओं... और शेर की चाल बोली नार की लाग है, ...बात पूरी हिंडोली मान’’ जैसे गीत मतदाताओं को सुनाए जा रहे हैं। कोटा उत्तर के प्रत्याशी शांति धारीवाल ने भी प्रचार के लिए हाड़ौती बोली में गीत तैयार कराए हैं।
यहां दर्द भरे गीत: बयाना विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी रितु बनावत जनसंपर्क के दौरान अपने भाषण के साथ मतदाताओं को दर्द भरे गीत सुना रही हैं। गीतों के माध्यम से यह बता रही हैं कि उसने जिस दल के लिए रात दिन काम किया उसने उसे धोखा दिया है। इसलिए अब सबकुछ आपके हवाले है। आप ही फैसला करो।
Updated on:
17 Nov 2023 10:26 am
Published on:
17 Nov 2023 10:25 am
