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सतीश पूनिया का सपना टूटा, आमेर से चुनाव हार गए

राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली है। भाजपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है। इस बीच प्रदेश में चर्चा हो रही है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

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Prashant Sharma defeats Satish Poonia, Congress wins Amer seat

राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली है। भाजपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है। इस बीच प्रदेश में चर्चा हो रही है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। लेकिन सतीश पूनिया अपनी ही सीट आमेर हार गए हैं। इस बार पूनिया विधानसभा में नहीं जा पाएंगे। वे कांग्रेस के प्रशांत शर्मा से चुनाव हार गए हैं।

सरल शब्दों में कहें तो, राजस्थान में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की है। भाजपा 1998 के बाद पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है। इस बीच प्रदेश में अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री के दावेदारों में कई नाम शामिल हैं, लेकिन सतीश पूनिया ने अपनी ही सीट आमेर हार जाने के कारण मुख्यमंत्री बनने की संभावना कम हो गई है। लेकिन पूनिया को राजस्थान भाजपा का चेहरा माना जाता है और उनके पास अनुभव भी है। ऐसे में उन्हें पार्टी में कोई महत्वपूर्ण पद दिया जा सकता है।

आपको बता दें कि जयपुर की आमेर सीट से भाजपा के सतीश पूनिया को कांग्रेस के प्रशांत शर्मा ने हरा दिया है। सतीश पूनिया की हार भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है। सतीश पूनिया ने साल 2000 में सादुलपुर से उपचुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। फिर उन्होंने 13 साल बाद आमेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हल्के मार्जिन से चुनाव हार गए। इसके बाद 2018 में वो आमेर से विधायक चुने गए।

सतीश पूनिया ने अपने राजनीतिक जीवन में अब तक तीन बार चुनाव लड़े हैं। उन्होंने दो बार चुनाव हार गए हैं और एक बार जीत हासिल की है। इस साल के चुनाव में सतीश पूनिया ने अपनी ही सीट आमेर से चुनाव लड़ा था, लेकिन कांग्रेस के प्रशांत शर्मा से चुनाव हार गए। इस कारण से वे इस बार विधानसभा में नहीं जा पाएंगे।

आपको बता दें कि भाजपा ने सतीश पूनिया को राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, लेकिन पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से उनकी दूरी जल्द ही दुश्मनी में बदल गई। 8 मार्च को राजे का जन्मदिन था, लेकिन इसी दिन को पूनिया ने जयपुर में प्रदर्शन करने के लिए चुना। साथ ही विधायकों को जयपुर में हाजिरी लगाने को कहा। हालांकि, इसके कुछ दिन बाद ही वे प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिए गए।