
Rajasthan Election- हॉट सीट महुवा में जाति-भय-भक्ति के बीच वोटर के साहस की अग्निपरीक्षा
अमित शर्मा
मीणा बहुल वाली महुवा सीट वास्तव में हॉट है। दावेदारी से लेकर टिकट मिलने तक और अब बागियों समेत मौजूदा प्रत्याशियों को देखें तो यहां चुनावी सरगर्मियां आपको उत्तरप्रदेश-बिहार के चुनाव का नजारा दिखाती हैं। महुवा सीट पर प्रत्याशी चयन तक में दलों के पसीने छूटे। कांग्रेस के सभी प्रत्याशी घोषित होने के बाद बस इसी सीट पर पशोपेश था। बीजेपी का भी कमोबेश यही हाल रहा।
विधायक ओमप्रकाश हुड़ला का टिकट कटने का कारण उनकी जनता में नापसंदगी नहीं रही बल्कि किरोड़ी लाल मीना का फिर से भाजपा में आना रहा। धुर विरोधी हुड़ला का टिकट कटवाकर अपने भतीजे राजेन्द्र मीना को टिकट दिलाने में किरोड़ी कामयाब रहे। हुड़ला बगावत कर मैदान में हैं। बगावत कांग्रेस में भी हुई, पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह मैदान में हैं।
कांग्रेस ने यहां अजय बोहरा को टिकट दिया है। बसपा ने यहां से अजय के चाचा विजय शंकर बोहरा को फिर से मैदान में उतारा है। ये भतीजे-चाचा की जोड़ी है। बोहरा परिवार को यहां सरपंचों के परिवार से भी जाना जाता है। चाचा विजय शंकर बोहरा 2008 में भी बसपा से चुनाव लड़े थे। भतीजा अजय बोहरा पहली बार चुनाव लड़ रहा है। अजय के दादा पंडित विशंभर दयाल भी विधायक रह चुके हैं।
महुवा विधानसभा सीट अक्सर निर्वाचन विभाग के लिए भी सिरदर्द रही है। बूथ कैप्चरिंग या किसी न किसी बूथ के बाहर झगड़ा होना आम बात है। पिछले लोकसभा चुनाव में साथा गांव में विवाद हुआ था। वहीं पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान बालाहेड़ी में झगड़े में गोलियां चली थीं, एक शख्स की मौत तक हो गई थी।
उस मामले में मौजूदा विधायक पर दागी का ठप्पा भी लगा था। पांच लाख जनसंख्या वाले इस विधानसभा क्षेत्र में ऐतिहासिक कुछ भी नहीं। किला है वो खंडहर पड़ा है। बाहरी लोगों के लिए पहले ये लूट-पाट और स्थानीय लोगों के लिए आए दिन होने वाले झगड़ों, बाजार बंद के लिए बदनाम रहा है। स्थानीय लोग पहले से बेहतर स्थिति देख थोड़ा खुश हैं।
मुख्य बाजार में सीसीटीवी लग गए हैं, नगर पालिका बन गई है, स्कूलों की हालत थोड़ी सुधरी है, सड़कें बेहतर हुई हैं,पर खौफ अभी भी फिजा से गया नहीं है। यह चुनाव वोटरों के साहस की भी परीक्षा है। पेठे के लड्डू यहां की पहचान हैं, पर उतनी मिठास यहां की राजनीति में क्यों नहीं, ये सवाल जेहन में बना हुआ है। यहां भाजपा के राजेन्द्र मीना की सबसे बड़ी ताकत चाचा किरोड़ी लाल मीणा हैं। ओमप्रकाश हुडला निर्दलीय मैदान में हैं।
राजेन्द्र महुवा के पूर्व प्रधान भी रहे हैं। मीणा बाहुल इस इलाके में ओम प्रकाश और राजेन्द्र, दोनों का मीणा होना, वोटर्स के लिए अग्नि परीक्षा समान होना तय है। कांग्रेस के बागी अजीत सिंह जिला प्रमुख रहे हैं।
वोटर सीधे सीधे बोल नहीं सकता किसे वोट देगा, अमन चैन कायम रखने के लिए ये जरूरी भी है। कुल मिलाकर हॉट सीट पर हॉट मुकाबला रहेगा, प्रशासन 7 दिसंबर तक ही नहीं, 11 दिसंबर तक कितना टैम्प्रेचर मेंटेन कर पाता है, ये देखने और परखने वाली बात रहेगी।
चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार बने पर वह महिलाओं के लिए काम करें। महुआ में शांति बने, हॉस्पिटल की सुविधा बेहतर हो और शिक्षा की स्थिति सुधरे।
चंचल अग्रवाल, गृहिणी
मैं बहुत उत्साहित हूं, पहली वोट डालूंगा। हमारे यहां क्षेत्र में लोग जाति के नाम पर वोट डालते हैं। पर मैं जाति के नाम पर वोट डालने की बजाए उम्मीदवार को देखकर वोट दूंगा
योगेश गोयल, नव मतदाता
दोनों प्रत्याशी का हाल क्या है?
राजेंद्र मीना, भाजपा
ताकत: चाचा किरोड़ी लाल मीना का होना। पूर्व प्रधान रहते हुए विकास कार्यों की सूची। हर ग्राम पंचायत में बनी अथाई (चौपाल) को अब भी याद किया जाता कमजोरी: भाजपा के बागी विधायक ओमप्रकाश हुड़ला, अन्य प्रत्याशी राजेन्द्र मीना और कांग्रेस के बागी पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह का सामने होना।
अजय बोहरा, कांग्रेस
ताकत: अजय भी राजनीतिक पृष्ठभूमि से हैं। उनके दादा विशंभर दयाल भी विधायक रह चुके हैं।
कमजोरी: अजय पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। कम अनुभव और सामने अपने चाचा समेत कई मजबूत प्रत्याशी हैं।
Updated on:
29 Nov 2018 12:49 pm
Published on:
29 Nov 2018 08:22 am
