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अफसरों का फर्जीवाड़ा, रिश्तेदारों को बांटी नौकरियां, मंत्री की नोटिंग तक बदल दी

राज्य में 'काले कानून' के विरोध के बीच अफसरों का गम्भीर फर्जीवाड़ा सामने आया है।

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ओमप्रकाश शर्मा/जयपुर। राज्य में 'काले कानून' के विरोध के बीच अफसरों का गम्भीर फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न मिशन में चहेतों को नौकरी देने के लिए आईएएस नीरज के. पवन व उनके मातहत अधिकारियों ने यह फर्जीवाड़ा किया।

पहले तो फर्जी व कमतर डिग्रियों के आधार पर नाते-रिश्तेदारों को हजारों रुपए महीने की नौकरियां दे दी। फिर मामला खुलने का डर सताया तो तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की नोटिंग ही बदल दी। जब एसीबी ने मंत्री को फाइल दिखाई तो सच सामने आया। अब इन अधिकारियों के खिलाफ सरकार से अभियोजन स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद गिरफ्तार कर चालान पेश किया जाएगा।

मामला केन्द्र सरकार की योजना के अन्तर्गत चल रहे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़ा है। इसके तहत वर्ष 2014-15 के लिए 6 जिलों में ७ पदों पर भर्ती करनी थी। हर जिले में मनोरोग विशेषज्ञ, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, साइकेट्रिक सोशल वर्कर, साइकेट्रिक नर्स, मॉनिटरिंग एंड ई-वैल्यूवेशन ऑफिसर, केस हिस्ट्री असिस्टेंट तथा कम्यूनिटी नर्स की भर्ती करनी थी।

टेंडर खोलने पर बताई शर्तें
जांच में सामने आया कि संविदा भर्तियों के लिए किस कम्पनी को ठेका देना है, यह पहले ही तय कर लिया गया था। इसलिए जारी विज्ञप्ति में सेवा शर्तों का उल्लेख ही नहीं किया गया। टेंडर में 4 कम्पनियां आईं लेकिन शर्तें टेंडर खोलने के दिन बताई गई। ये १० शर्तें पूरी करने के लिए मात्र २ दिन का समय दिया गया। इसमें मात्र एक कम्पनी दीक्षित कम्प्यूटर फर्म को पात्र माना गया। उसे टेंडर देने के बाद सरकार से अनुमोदन तक नहीं कराया गया। एसीबी की जांच में सामने आया कि फर्म के पंजीकरण सम्बंधी दस्तावेज भी फर्जी थे।

मंत्री की नोटशीट में काट-छांट
निजी फर्म से संविदा पदों के लिए एक वर्ष का अनुबंध किया गया। एक साल बाद लगभग उन्हीं कर्मचारियों को यथावत रखा गया। सरकार ने उनसे एक साल का और करार कर लिया। इस बीच विभाग में गड़बड़ी की बातचीत सामने आने लगी और बिना योग्यता के रिश्तेदारों को नौकरी देने की चर्चा चली। इस पर नोडल ऑफिसर रामअवतार जायसवाल ने फाइल पर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की टिप्पणी में योग्यता की शिथिलता अंकित कर दी। एसीबी ने फाइल मंत्री को दिखाई तो उन्होंने कहा कि यह कांट-छांट किसी और ने की है। एसीबी ने ७ महीने की तफ्तीश के बाद आरोप साबित माने हैं। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार हो चुके नीरज के. पवन हाल ही बहाल किए गए हैं।

नए अधिकारी ने बंद की सेवाएं
मिशन की जिम्मेदारी नए अधिकारी प्रदीप शर्मा को मिली। उन्होंने प्रथम दृष्टया मामला गलत मानते हुए सबकी सेवाएं बंद कर दी।

अब होगा चालान
फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर एसीबी ने गत 30 मार्च को एफआईआर दर्ज की थी। मामले की तफ्तीश एडिशनल एसपी हेमाराम ने की। तफ्तीश पूरी होने पर मामला चालान का पाया गया। इस पर एसीबी के मुखिया आलोक त्रिपाठी ने मुहर लगा दी है। अब एसीबी आरोपित अधिकारियों की गिरफ्तारी भी कर सकती है।

इन रिश्तेदारों की हुई पहचान
- एमडी नीरज के. पवन के रिश्तेदार शिवांग सैनी व पंकज सैनी
- डायरेक्टर डॉ. बीआर मीना का भाई चंद्रप्रकाश मीना
- नोडल ऑफिसर रामअवतार जायसवाल के भाई की पत्नी डॉ. नीरज, भांजा अजय जायसवाल, भांजी दामाद सुरेशचंद्र जायसवाल
- संविदाकर्मी उपलब्ध कराने वाली कम्पनी के संचालक की पत्नी ममता गौड़ व बहनोई राजेन्द्र
- उक्त तीन अधिकारियों और दो समिति सदस्यों के खिलाफ चालान पेश होगा।

इन पदों पर की गड़बड़ी
पद --- तय योग्यता --- कमतर को लिया
- क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट --- एमफिल क्लीनिकल सा --- एमए
- साइकेट्रिक सोशल वर्कर --- एमफिल --- एमए
- साइकेट्रिक नर्स --- एमएससी साइकेट्रिक नर्सिंग --- बीएससी