
जयपुर।
गहलोत सरकार की राजनीतिक नियुक्तियों के तहत तीन नेताओं को कैबिनेट मंत्री का दर्ज़ा दिए जाने का मामला तूल पकड़ने लगा है। प्रमुख विरोधी दाल भाजपा ने इस कवायद को असंवैधानी करार देते हुए अब न्यायालय में चुनौती देने तक का मन बना लिया है। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बाद आज विधायक रामलाल शर्मा ने भी पार्टी के रुख को दोहराया है।
विधायक रामलाल शर्मा ने आज विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा कि राजनीतिक नियुक्तियां एक तय प्रक्रिया के अनुसार की जाती हैं और एक निर्धारित मापदंड के अनुसार ही नियुक्ति पाने वाले नेताओं को लाभ दिया जा सकता है।उन्होंने कहा कि सरकार में हालिया हुई नियुक्तियों में नियम-कायदे दरकिनार किये गए हैं। ऐसे में हर पहलू का अध्ययन करने के बाद भाजपा जल्द ही उच्च न्यायालय में सरकार की कवायद को चुनौती देगी।
ये दी जा रही है दलील
विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का कहना है कि सरकार द्वारा राजनीतिक नियुक्ति पाने वाले 3 नेताओं को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देना संविधान के अनुच्छेद 164 (1A) के प्रावधान का उल्लंघन है। इस प्रावधान में एक राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत तक ही हो सकती है, जिसका गहलोत सरकार ने सरासर उल्लंघन किया है।
सरकारी खजाने पर सफेद हाथी बाँधने का काम: राठौड़
उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस सरकार आंतरिक विद्रोह को दबाने के लिए अवैधानिक पदों की रेवड़ियां राजनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से बांट रही है। ये राजस्थान के सरकारी खजाने पर सफेद हाथी बांधने जैसा काम है।
Published on:
02 Mar 2022 03:05 pm
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