
amyra suicide case (Patrika Photo)
amyra suicide case: जयपुर: नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा की आत्महत्या मामले के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से स्कूल की मान्यता रद्द करने के निर्णय का विरोध तेज हो गया है। निजी स्कूल संगठन सीबीएसई के आदेश का विरोध कर रहे हैं।
वहीं, इस निर्णय से अभिभावक बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंतित हैं। नए सत्र में बच्चों के लिए अभिभावक नए स्कूल तलाशने में जुट गए हैं। उनका कहना है कि वे अब तक 12वीं तक की शिक्षा को लेकर निश्चिंत थे, लेकिन अचानक आए इस निर्णय ने परेशानी बढ़ा दी है। बड़ी कक्षाओं में प्रवेश न मिलने से कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है।
गुरुवार को जवाहर नगर स्थित एक स्कूल में स्वयंसेवी शिक्षण संस्था संघ, राजस्थान का प्रांतीय अधिवेशन डॉ. एल. सी. भारतीय की अध्यक्षता में हुआ। अधिवेशन में प्रदेशभर से आए निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों और पदाधिकारियों ने सीबीएसई के आदेश की कड़ी निंदा की। वक्ताओं ने कहा कि यह निर्णय विद्यार्थियों और कर्मचारियों के हितों के विपरीत है।
संघ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की करीब 40 हजार गैर सरकारी शिक्षण संस्थाएं विरोध में हैं। वक्ताओं ने कहा कि बोर्ड ने निर्णय लेते समय विद्यालय में पढ़ रहे लगभग 5 हजार विद्यार्थियों, कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों तथा बस चालकों-परिचालकों के भविष्य पर विचार नहीं किया। किसी एक घटना के आधार पर इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की पढ़ाई और कर्मचारियों की आजीविका को संकट में डालना न्यायसंगत नहीं है।
-स्कूल के पास सीबीएसई मानकों के अनुसार निर्धारित न्यूनतम भूमि होनी चाहिए।
-भूमि स्कूल के नाम पर अथवा दीर्घकालीन लीज पर हो।
-भवन सुरक्षित, पक्का और शैक्षणिक गतिविधियों के अनुकूल होना जरूरी है।
-स्कूल किसी ट्रस्ट, सोसायटी या कंपनी अधिनियम के तहत विधिवत पंजीकृत होना चाहिए।
-स्कूल को राज्य शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त होना आवश्यक है।
-राजस्थान में गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम एवं नियमों का पालन जरूरी है।
-सभी शिक्षक प्रशिक्षित और सीबीएसई मानकों के अनुसार योग्य हों।
-शिक्षक वेतन का भुगतान बैंक खाते के माध्यम से अनिवार्य है।
-पीएफ, ईएसआई और सेवा शर्तों का पालन जरूरी है।
-अग्नि सुरक्षा व भवन सुरक्षा प्रमाण पत्र और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हो।
-सीसीटीवी कैमरे, बाल संरक्षण नीति और आपातकालीन व्यवस्थाएं अनिवार्य हों।
-स्कूल बसों के लिए परिवहन नियमों का पालन जरूरी है।
-शुल्क निर्धारण पारदर्शी हो और अभिभावकों से मनमानी वसूली न की जाए।
-प्रवेश प्रक्रिया स्पष्ट और भेदभाव रहित हो।
Updated on:
02 Jan 2026 09:23 am
Published on:
02 Jan 2026 07:36 am
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