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ऐसे फिरते हैं दिन: करोड़ों रुपयों का होटल रातों रात तोड़ दिया सरकार ने, गरीब चाय वाले की सौ गज जमीन हथियाना चाह रहा था.. मंत्री दोस्त भी नहीं बचा पाए

न्याय के इंतजार में अब सरकार के खिलाफ पीड़ित परिवार को लेकर सांसद किरोड़ी लाल मीणा धरने पर आ गए हैं। मांगों का पूरा पर्चा सरकार को भिजवा दिया गया है, अब ये मांगे मानने का दबाव सरकार बर बनता जा रहा है। करीब दो दिन गुजर गए लेकिन लाश को अभी तक हाथ तक नहीं लगाने दिया गया है, लाश परिवार के कब्जे में है।

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जयपुर
आखिर करोड़ों रुपयों के महल को मलबे में बदल दिया गया है। बारह घंटे तक ताबड़तोड़ तोड़फोड़ की गई और आधी रात बाद यानि करीब साढ़े तीन बजे सब कुछ जमीन पर आ गिरा। बारह घंटे पहले तक जो महल था वह बारह घंटे के बाद मलबा बना दिया गया...। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि जमीन से गगनचुंबी इमारत बनने तक आखिर सरकारी मशीनरी ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया.....? जिम्मेदार अफसर फिर चाहे वे हैरिटेज नगर निगम के कमिश्नर विश्राम मीणा हों या फिर डिप्टी कमिश्नर नीलकमल मीणा हों.... या इनके अलावा और कोई विभाग के अफसर हों... क्या उन्हें इतना बड़ा भवन खड़ा होता दिखाई नहीं दिया ? सीएम गुस्सा हुए तो होटल तो तोड़ दी गई लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला है। न्याय के इंतजार में अब सरकार के खिलाफ पीड़ित परिवार को लेकर सांसद किरोड़ी लाल मीणा धरने पर आ गए हैं। मांगों का पूरा पर्चा सरकार को भिजवा दिया गया है, अब ये मांगे मानने का दबाव सरकार बर बनता जा रहा है। करीब दो दिन गुजर गए लेकिन लाश को अभी तक हाथ तक नहीं लगाने दिया गया है, लाश परिवार के कब्जे में है।

पहले बात नगर निगम कार्रवाई की... विरोध इतना बढ़ा कि पुलिस सुरक्षा में जान बचाकर भागे निगम के डिप्टी कमिश्नर...
दरअसल सुभाष चौक थाना इलाके में स्थित चांदी की टकसाल क्षेत्र के राजामल का तालाब इलाके में चार मंजिला होटल को लेकर यह सारा फसाद खड़ा हुआ। सैंकड़ो वर्ग गज जमीन पर बन रहे महलनुमा इस होटल का निर्माण जारी था। होटल के नजदीक ही सौ वर्ग गज जमीन पर रहने वाले रामप्रसाद मीणा अपने परिवार के साथ रह रहा था। चाय की थड़ी चलाकर परिवार पालने वाले रामप्रसाद ने मकान छोटा पडने पर उसका कुछ हिस्सा बनाने की कोशिश की तो होटल वालों और अन्य लोगों ने मिलकर उसे मकान नहीं बनाने दिया। यहां तक कि उसकी जमीन पर गार्ड बिठा दिए और परिवार को ही वहां से भगाने की कोशिश की। इसमें नजदीक ही स्थित गिरधारी जी के मंदिर में पुजारी और अन्य लोगों के साथ ही होटल मालिक और मंत्री महेश जोशी का नाम सामने आया। कहीं से भी इंसाफ नहीं मिला तो रामप्रसाद ने सुसाइड़ वीडियो बनाकर जान दे दी। उसके बाद विरोध प्रदर्शन शुरु हुए। सीएम गुस्सा हो गए और एक ही झटके में होटल गिराने के आदेश आ गए। मंगलवार दोपहर करीब दो बजे होटल तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुई और देर रात करीब साढ़े तीन बजे तक कई जेसीबी, पोकलेन मशीनें, लोखंडा मशीने जुट गई और महल को मलबा बना दिया गया।

अब बात रामप्रसाद के परिवार की.... जब तक न्याय नहीं तब तक अंतिम संस्कार नहीं
रामप्रसाद मीणा की लाश का आज अंतिम संस्कार करने के हालात बन रहे हैं। परिवार की जो सबसे बड़ी मांग थी वह पूरी हो गई है। होटल को गिरा दिया गया है चौबीस घंटे के भीतर...। अब सांसद किरोड़ी लाल मीणा बैठे हैं और उन्होनें पर्चा सौंपा है सरकार को। परिवार को एक करोड़ की आर्थिक सहायता का, एक सदस्य को सरकारी नौकरी का, सरकारी योजना के अनुसार मकान देने का और दोषियों को गिरफ्तार करने का...। बताया जा रहा है कि आज सरकार की ओर से एक प्रतिनिधी मंडल इस मामले में किरोडी लाल मीणा और रामप्रसाद के परिवार से मिल सकता है और फिर इस मामले का पटाक्षेप हो सकता है।

सबसे बड़ी बात.....
इस पूरे मामले पर अब सीएम स्तर पर नजर रखी जा रही है। सरकार के मंत्री महेश जोशी पर गंभीर आरोप लगने के बाद उन्होने अपने आप को इस पूरे मामले मंे निर्दोष बताया है। उधर कमिश्नर विश्राम मीणा और डिप्टी कमिश्नर नीलकमल मीणा या अन्य किसी अफसर के बारे में फिलहाल सरकार स्तर पर कोई एक्शन नहीं लिया जा सका है। हांलाकि इनकी भूमिका की भी अंदरखाने जांच की जा रही है।