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राजस्थान हाईकोर्ट के ACS-कलक्टरों को निर्देश: पैरवी में जो अधिकारी लापरवाही करे… एसीआर खराब करो, जुर्माना वसूलो

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार से संबंधित मामलों में पैरवी में लापरवाही और केस प्रभारी अधिकारियों (ओआइसी) की ढिलाई पर कड़ी फटकार लगाई।

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rajasthan highcourt

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Rajasthan High Court: हाईकोर्ट ने सरकार से संबंधित मामलों में पैरवी में लापरवाही और केस प्रभारी अधिकारियों (ओआइसी) की ढिलाई पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि अदालतों में सरकार से संबंधित प्रकरणों की संख्या काफी अधिक है, इनमें केस प्रभारी अधिकारियों (ओआइसी) और सरकारी वकीलों की जवाबदेही तय की जाए।

कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता को मामले लंबित रहने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इन अधिकारियों की वजह से न्याय प्रक्रिया बाधित हो रही है। इस कारण जो भी अधिकारी लापरवाही बरते, उसकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) खराब कर आवश्यक होने पर जुर्माना भी लगाया जाए।

न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव व विभागीय निदेशकों को निर्देश दिया कि वे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करें। कोर्ट ने इस मामले में 15 अप्रेल तक पालना रिपोर्ट तलब कर चेतावनी दी कि यदि आदेश की अवहेलना हुई तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

2016 से लंबित केस, वकील के पास फाइल ही नहीं

न्यायाधीश ढंड ने बद्रीनारायण शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के अधिकारियों की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 2016 से लंबित मामले में केस प्रभारी अधिकारी ने विभाग के वकील को केस की मूल फाइल तक नहीं सौंपी। उन्होंने इसे व्यवस्थागत विफलता बताते हुए कहा कि इसी तरह के कारणों से न्याय में अनावश्यक देरी हो रही है।

कोर्ट ने कहा, ओआइसी यह करें

कोर्ट ने सभी केस प्रभारी अधिकारियों को आदेश दिया कि वे एक माह के भीतर अपने लंबित सभी मामलों की सूची तैयार करें और संबंधित सरकारी वकीलों को सौंपें।

केस प्रभारी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और उनकी सफलता दर को सेवा रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।

अनावश्यक देरी या लापरवाही पर अधिकारियों को दंडित किया जाए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित केस मैनेजमेंट सिस्टम विकसित हो, जिससे प्रभावी ट्रैकिंग हो सके।

ऑटोमैटिक डॉक्यूमेंट फाइलिंग सिस्टम बनाएं, जिससे वकीलों को केस की फाइलें समय पर मिल सकें।

निगरानी डैशबोर्ड बनाया जाए, जिससे लंबित मामलों की अपडेट स्थिति पर निगरानी की जा सके।

अच्छा परिणाम देने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे कार्यशैली में सुधार हो।

केन्द्रीयकृत मॉनिटरिंग सिस्टम लागू हो, जिससे विभागों में समन्वय और मुकदमों की निगरानी बढ़े।

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