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राजस्थान में रिटायर्ड कर्मचारी की पेंशन बहाल, पंचायत चुनाव को लेकर आई बड़ी खबर

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के रिटायर्ड कर्मचारी की पेंशन बहाल करने का अहम आदेश दिया है। अदालत के फैसले से हजारों पेंशनर्स को बड़ी राहत मिली है। वहीं, पंचायत चुनाव को लेकर भी महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है।

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जयपुर

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Arvind Rao

Jan 22, 2026

Rajasthan retired employees pension

राजस्थान हाईकोर्ट के दो बड़े फैसले (फोटो-एआई)

Rajasthan retired employees pension: राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े दो अहम मामलों पर स्पष्ट और प्रभावी फैसले सुनाए। एक ओर जहां पंचायतों के पुनर्गठन और मुख्यालय परिवर्तन को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं। वहीं, दूसरी ओर रिटायर्ड कर्मचारी की पूरी पेंशन बहाल करने के आदेश ने पेंशनर्स को बड़ी राहत दी है।

पंचायत पुनर्गठन से जुड़े मामलों में जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने मुन्नालाल समेत लगभग पांच दर्जन याचिकाओं को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि इसी मुद्दे पर हाईकोर्ट की एक अन्य खंडपीठ पहले ही फैसला दे चुकी है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है। ऐसे में दोबारा हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है।

अनदेखी और जनसुनवाई न होने का आरोप

याचिकाकर्ताओं ने नवंबर और दिसंबर 2025 में जारी पंचायत पुनर्गठन की संशोधित अधिसूचनाओं को चुनौती देते हुए नियमों की अनदेखी और जनसुनवाई न होने का आरोप लगाया था। राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलील दी कि पूरी प्रक्रिया कानून के तहत की गई और इसका उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।

सौ फीसदी पेंशन बहाल करने का आदेश

दूसरे अहम फैसले में जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने रिटायर्ड कर्मचारी विलायती राम की रोकी गई सौ फीसदी पेंशन बहाल करने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कर्मचारी को विभागीय जांच और आपराधिक मामले दोनों में दोषमुक्त कर दिया गया हो, तो केवल एक पुलिस बयान के आधार पर पेंशन रोकना अनुचित है।

विलायती राम पर सेवाकाल के दौरान जाति प्रमाणपत्र को लेकर आरोप लगे थे। लेकिन जांच और ट्रायल में वे बरी हो चुके थे। इसके बावजूद उनकी पेंशन रोक दी गई थी, जिसे कोर्ट ने गलत ठहराते हुए सभी बकाया लाभ तुरंत देने के निर्देश दिए।
इन दोनों फैसलों को प्रशासनिक स्थिरता और कर्मचारियों के अधिकारों की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। जहां पंचायत पुनर्गठन पर अदालत की मुहर से आगामी पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हुआ है।