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गहलोत सरकार ने बदला उद्योग विभाग का नाम, जानें क्या मिली नई पहचान- क्यूं पड़ी ज़रुरत?

गहलोत सरकार ने ‘उद्योग विभाग‘ का नाम बदल दिया है, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस संबंध में एक प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया है। इसके साथ ही, इस विभाग के अधिकारियों के पदनाम भी विभाग के नए नाम के अनुरूप परिवर्तित हो रहे हैं

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rajasthan industry department name changed by gehlot government

जयपुर।

राज्य सरकार ने ‘उद्योग विभाग‘ का नाम बदलकर अब ‘उद्योग एवं वाणिज्य विभाग‘ कर दिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस संबंध में एक प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया है। इसके साथ ही, इस विभाग के अधिकारियों के पदनाम भी विभाग के नए नाम के अनुरूप परिवर्तित हो जाएंगे।

नाम बदले जाने का ये है कारण

दरअसल, बीते कुछ वर्षों के दौरान उद्योग विभाग और इससे जुड़े जिला उद्योग केन्द्रों की कार्यप्रणाली में बदलाव हुआ है तथा विभाग के कार्याें का दायरा भी बढ़ गया है। लघु, सूक्ष्म, मध्यम एवं वृहद उद्यमों के विकास के साथ-साथ सेवा क्षेत्र एवं वाणिज्यिक क्षेत्र की गतिविधियों का विकास भी इस विभाग के कार्यकलापों एवं गतिविधियों में शामिल हो गया है।

यही नहीं, भारत सरकार सहित 18 राज्यों में भी तत्संबंधित विभाग का नाम उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने विभाग का नाम परिवर्तित करने का निर्णय लिया है।

अधिकारियों के भी पदनाम बदले

मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, विभाग के नाम परिवर्तन के साथ ही अधिकारियों के पदनामों में भी परिवर्तन किया जा रहा है, इसके तहत-

1. प्रमुख शासन सचिव, उद्योग एमएसएमई का नाम अब प्रमुख शासन सचिव, उद्योग एमएसएमई एवं वाणिज्य हो गया है

2. आयुक्त उद्योग का नाम बदलकर अब आयुक्त उद्योग एवं वाणिज्य हो गया है

3. संयुक्त आयुक्त उद्योग का पदनाम अब संयुक्त आयुक्त उद्योग एवं वाणिज्य

4. उप आयुक्त उद्योग का पदनाम अब उप आयुक्त उद्योग एवं वाणिज्य

5. सहायक आयुक्त उद्योग का पदनाम अब सहायक आयुक्त उद्योग एवं वाणिज्य हो गया है

सरकार का दावा है कि इस परिवर्तन से राज्य एवं केन्द्र के संबंधित विभागों के नाम में एकरूपता होने से राज्य में वाणिज्यिक एवं निर्यात संबंधित गतिविधियों के विस्तार के काम में अधिक गति आएगी और विभाग भारत सरकार की योजनाओं एवं कार्यक्रमों का बेहतर प्रचार-प्रसार हो सकेगा।

इस निर्णय से प्रदेश में निर्यात संवर्धन, वाणिज्यिक गतिविधियों एवं लॉजिस्टिक सेवा क्षेत्रों और इनके उप-क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, प्रदेश में रोजगार के अधिक अवसर सृजित होंगे और राजस्व में भी वृद्धि होगी।