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Sachin Pilot ने बढ़ाई Ashok Gehlot सरकार की मुश्किलें, मुख्यमंत्री को जोड़ने पड़ गए हाथ

Rajasthan Infants Death: Sachin Pilot takes on Ashok Gehlot government: Kota के जेके लोन अस्पताल में एक महीने में 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत मामले में शनिवार को आये पायलट के बयान के बाद मामला कुछ ज़्यादा ही गरमा गया है। नौबत यहां तक आ गई कि पायलट की प्रतिक्रिया पर प्रतिक्रिया देने से सीएम गहलोत कन्नी काट गए।

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Rajasthan Infants Death: Sachin Pilot takes on Ashok Gehlot government

जयपुर।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Ashok Gehlot ) और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ( Sachin Pilot ) के बीच की 'खट्टास' एक बार फिर सामने आ गई है। दरअसल, कोटा के जेके लोन अस्पताल ( Rajasthan Kota J K Lone Hospital ) में एक महीने में 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत ( Infant Deaths ) मामले में शनिवार को आये पायलट के बयान के बाद मामला कुछ ज़्यादा ही गरमा गया है। नौबत यहां तक आ गई कि पायलट की प्रतिक्रिया पर प्रतिक्रिया देने से सीएम गहलोत कन्नी काट गए। यहां तक कि उन्हें सवाल को टालने के लिए मीडिया के सामने हाथ जोड़कर रवाना होना पड़ गया।


गौरतलब है कि सार्वजनिक मंचों पर मुख्यमंत्री गहलोत अब तक कोटा में बच्चों की मौतों पर सफाई देते दिखाई दिए, लेकिन इस संबंध में सवालों का उन्होंने जवाब ही नहीं दिया। कोटा में उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बयान पर सवाल पूछते ही गहलोत उठ खड़े हुए और हाथ जोड़ते हुए तेजी से निकल गए।


सचिन बोले, 'सालभर से हम चला रहे सरकार, तय करनी होगी मौत की जिम्मेदारी'उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की लगातार मौतें और बिगड़ते हालातों का शनिवार को जायजा लेने के बाद अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। पायलट के बयान ने गहलोत सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।


पायलट का कहना था कि बीते एक साल से सरकार हम चला रहे हैं। ऐसे में अब जितनी भी मौतें हुई हैं, उनकी जिम्मेदारी हमारी बनती है। उन्होंने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसकी गलती है, लेकिन यह पता लगाना जरूरी है। हालाकि व्यवस्थाएं सुधारने के सवालों पर वे चुप्पी साध गए।


पायलट ने खरी-खरी सुनाते हुए कहा, 'जवाबदेही तय होनी चाहिए, अस्पताल के हालात अब भी बदतर हैं। आक्सीजन पाइप लाइन नहीं हैं। दीवारों में सीलन है, वार्मर खराब पड़े हैं, वेंटिलेटर तक कबाड़ हो चुके हैं। अस्पताल के पास छह करोड़ रुपए का बजट मौजूद, लेकिन सुधार की किसी ने सुध नहीं ली। हम लोगों का अब तक का रिस्पांस बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है। जिन बच्चों की मौतें हुई है, उनके गरीब अभिभावकों की मदद करनी चाहिए। यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसने गलती की, लेकिन यह पता लगाना ही होगा। हम लोगों को जवाबदेही तय करनी पड़ेगी।


निशाना साधते रहे...सवालों पर चुप्पी
पायलट नाम लिए बगैर ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सरकार के मंत्रियों की कार्यशैली पर निशाना साधते रहे, व्यवस्थाएं सुधारने का सवाल पूछने के बाद भी वह न सिर्फ उसे टालते रहे, बल्कि सुपर स्पेशलिटी विंग कब तक शुरू होगी और अस्पतालों में स्टाफ एवं संसाधनों की कमी सरकार कब खत्म कराएगी जैसे सवाल सुनते ही वह प्रेस वार्ता खत्म कर चले गए।