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राजस्थान में रोजगार परक शिक्षा न होने से बढ़ रहे पढ़े-लिखे बेरोजगार, अब नई शिक्षा नीति से बदलाव की संभावना

Rajasthan Unemployment Report: भारत में बिना औपचारिक शिक्षा वाले युवाओं की तुलना में उच्च शिक्षित युवा बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। राजस्थान की बात करें तो यहां भी शिक्षित बेरोजगारों की संख्या कम नहीं है।

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ILO Report on Unemployment: भारत में बिना औपचारिक शिक्षा वाले युवाओं की तुलना में उच्च शिक्षित युवा बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। भारत के श्रम बाजार पर इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (आइएलओ) की हाल ही जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में स्नातक बेरोजगारी दर 29.1 प्रतिशत थी, जो पढ़ या लिख नहीं सकने वाले लोगों की दर 3.4 प्रतिशत से लगभग नौ गुना अधिक है। राजस्थान की बात करें तो यहां भी शिक्षित बेरोजगारों की संख्या कम नहीं है।

प्रदेश में 24 लाख से अधिक कुल बेरोजगार रोजगार विभाग में पंजीकृत हैं। इनमें से 10 लाख से अधिक ऐसे बेरोजगार हैं जो उच्च शिक्षा प्राप्त किए हैं। इनमें भी करीब 1.75 लाख बेरोजगार स्नातकोत्तर हैं और शेष करीब 8 लाख से अधिक स्नातक हैं। विशेषज्ञों की मानें तो रोजगार परक शिक्षा की कमी राजस्थान में शिक्षित बेरोजगारों की बढ़ती संख्या का प्रमुख कारण है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति बदलेगी तस्वीर
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के नाम पर सिर्फ डिग्री बांटी जा रही है। लेकिन अब यूनिवर्सिटीज की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर काम शुरू किया जा रहा है। इसमें डिग्री नहीं, कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया है।

डिग्री काम नहीं आई, घर का बिजनेस आगे बढ़ाया
वैशाली नगर निवासी रवि कोटिया एम.कॉम. हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए तैयारी की, लेकिन डिग्री काम नहीं आई। रवि ने अपने परिवार के ड्राइक्लीनिंग के व्यवसाय को ही आगे बढ़ाने की ठानी। इसके लिए आधुनिक मशीन भी लगवाई है।

फर्नीचर के व्यापार से पिता कमा रहे लाखों
भंवर सिंह फर्नीचर का काम करते हैं। यह व्यापार पुश्तैनी है, लेकिन भंवर सिंह के बेटे ने स्नातक कर नौकरी की तैयारी की, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं लगी। अभी एक निजी स्कूल में पढ़ा रहे हैं। पुश्तैनी काम से पिता लाखों कमा रहे हैं।

राज्य में दो लाख लोग ले रहे भत्ता
प्रदेश में रोजगार विभाग की ओर से दो साल से दो लाख लोगों को बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है। ये वे बेरोजगार हैं, जो स्नातक हैं और उनके पास आय का कोई स्रोत नहीं है। राजस्थान में गत कांग्रेस सरकार ने बेरोजगारों के लिए मासिक भत्ता शुरू किया था।

बड़ा कारण: सरकारी नौकरियों की ओर दौड़
विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान में बेरोजगारी का बड़ा कारण यह भी है कि यहां युवा सरकारी नौकरी को प्राथमिकता दे रहे हैं। युवा कौशल आधारित शिक्षा की बजाय डिग्री लेने में फोकस कर रहे हैं। राजस्थान में युवा सबसे अधिक शिक्षक बनने की दौड़ में रहते हैं। यही कारण है कि सबसे ज्यादा बेरोजगार बीएडधारी हैं। बीएड की एक लाख सीटों पर करीब पांच लाख से अधिक आवेदन आते हैं। अन्य युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं।

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टॉपिक एक्सपर्ट
राजस्थान में अधिकतर लोग सरकारी नौकरियों की ओर से अग्रसर हैं। शिक्षित बीएड सबसे अधिक संख्या में मिलेंगे। वहीं, सरकार के पास नौकरियां कम हैं, उतनी संख्या में भर्ती नहीं है। युवाओं को स्किल बेस्ड कोर्स की ओर से आगे बढ़ाना चाहिए। 12वीं बाद युवाओं को रोजगार चुन लेना चाहिए। राज्य में काफी संख्या में विवि हैं, इसीलिए यहां से अधिक डिग्री ली जा रही हैं। न्यू एजुकेशन पॉलिसी का लागू होना इस दिशा में बेहतर कदम है।
- प्रो. अनुराग शर्मा, निदेशक उद्यमिता एवं कौशल विकास केन्द्र राजस्थान विवि