
जयपुर। राजस्थान में इन दिनों गेहूं, सरसों फसल की कटाई हो चुकी है और काश्तकारों ने खेतों में खाली पड़े खेतों में जायद मूंग की बुवाई करना शुरू कर दिया है। किसान जायद में मूंग का उत्पादन कर अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते है।
मूंग की खेती रवी व खरीफ के बीच के खाली समय में आय देने के साथ भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में सहायक है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए। इसके लिए जाय में मूंग की खेती बेहतर विकल्प है। जायद मूंग की बुवाई के लिए मार्च से अप्रेल अंत तक का समय उपयुक्त है।
1. जैसी कुछ किस्मों की बुवाई अप्रेल अंत तक भी की जा सकती है। इसके अंकुरण के लिए उचित तापमान होना आवश्यक है। यह फसल 60—65 दिन में पक जाती है।
भूमि की उर्वरता बनाए रखने में सहायक
मृदा उपचार: भूमिगत कीटज्ञें व दीमक की रोकथाम के लिए बुवाई से पहले एण्डोसल्फान 4 प्रतिशत या क्यूनॉलफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से भूमि में मिलाएं
बीजदर: एक हैक्टेयर क्षेत्र में बुवाई के लिए 15—20 किलोग्राम बीज पर्याप्त है। कतार से कतार की दूर 25—30 सेमी, पौधे से पौधे की दूर 10—15 सेमी रखें।
बीजोपचार: तीन ग्राम पारद फफूंदनाशी या कैप्टॉन या 2 ग्राम थाईरम या 5 ग्राम इमिडाक्लोप्रिड प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचारित कर बुवाई करनी चाहिए।
ऐसे करें बुवाई
जायद मूंग की अधिक उपज देने वाली किस्मों का चयन करें। बुवाई के लिए एक या दो बार जुताई कर खेत तैयार रखें। जैव उर्वरकों कल्चर का प्रयोग करें। फसल को हमेशा खरपतवार विहीन रखें और समय पर पहली सिंचाई करें।
Updated on:
12 Apr 2018 05:57 pm
Published on:
12 Apr 2018 05:56 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
