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रिकाॅल: आज रिटायर हो रहे जेल डीजी राजीव दासोत, 33 साल के कैरियर में आरोप भी लगे तो सम्मानित भी होते रहे….

उनको पुलिस महानिदेशक, सतर्कता, खान विभाग राजस्थान के पद पर लगाया गया। उसके बाद उनको आरएससी बटालियनों का जिम्मा दिया गया और फिर वे पुलिस ट्रेनिंग सेंटर भेजे गए। वहां से कुछ समय के लिए होमगार्ड डीजी के पद पर रहे और अब जेल डीजी रहने के बाद आज रिटायर हो रहे हैं।

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Haryana: 13 Corona Positives prisoners absconding from Rewari jail

जयपुर
20 हजार से ज्यादा बंदी और तीन हजार से ज्यादा कार्मिक एवं अन्य स्टाफ को संभालने रहे डीजी जेल राजीव दासोत आज रिटायर हो रहे हैं। आज शाम को उनको जेल से विदाई दी जाएगी और इस विदाई की जेल अफसरों ने तैयारी कर ली है। उनको गाड़ी में बैठाकर बाहर तक लाने की सेरेमनी की जाएगी और साथ ही गार्ड आॅफ आॅनर भी दिया जाएगा। रिटायरमेट से पहले उन्होनें इस महीने बंदियों से जुड़े हुए कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए हैं।

एमबीए किया लेकिन वर्दी खींच लाई सेवा में
दासोत 1987 बैच के अफसर हैं और पेशे से एमबीए हैं। दासोत जैसलमेर, डूंगरपुर, चित्तौडगढ़, कोटा शहर और बीकानेर में एसपी रहने के साथ ही इंटेलीजेंस और सिक्योरिटी में भी एसपी रहे। फिर कुछ समय के लिए प्रतिनियुक्ति पर भी केंद्र में भेजे गए। इस दौरान उनको डीआईजी बीएसएफ की जिम्मेदारी दी गई। वापस लौटकर वे जयपुर, बीकानेर, जोधपुर और कोटा रेंज में आईजी पद पर भी रहे। अप्रैल 2012 में उनकी पदोन्नति पर दासोत को अतिरिक्त पद पर तैनात किया गया। उनको पुलिस महानिदेशक, सतर्कता, खान विभाग राजस्थान के पद पर लगाया गया। उसके बाद उनको आरएससी बटालियनों का जिम्मा दिया गया और फिर वे पुलिस ट्रेनिंग सेंटर भेजे गए। वहां से कुछ समय के लिए होमगार्ड डीजी के पद पर रहे और अब जेल डीजी रहने के बाद आज रिटायर हो रहे हैं।

दासोत के साथ जुड़े हुए हैं विवाद भी
आईपीएस राजीव दासोत के साथ कुछ विवाद भी जुड़े रहे और यहां तक कि विभाग के अफसर ही उनके पीछे रहे। जैसलमेर में पोस्टिग के दौरान सोने के सिक्कों और सिल्लियों से जुड़ा विवाद उनके साथ रहा। विभाग के ही आईपीएस स्तर के एक अफसर ने इसकी शिकायत सीएम लेवल तक की लेकिन बात नहीं बनी। अन्य पदों पर रहने के दौरान भी उनके बारे में बातें उपर तक पहुंची।

गोल्ड मेडिलिस्ट अफसर, सरकार ने भी अवार्डो से नवाजा
दासोत को राज्य सरकार ने सेवाओं के लिए कई पदक दिए हैं। उनमें पुलिस पदक, आॅपरेशन विजय पदक, ऑपरेशन पराक्रम पदक, डीजी एनसीबी और डीजी बीएसएफ के प्रशस्ति डिस्क, 32 बोर पिस्तौल से सम्मानित किया गया है। गणतंत्र दिवस.2015 में उनको राष्ट्रपति पदक भी सौंपा गया। अपनी कार्यशैली और सेवाओं के चलते दासोत विदेशों में भी पुलिस एजेंसियों से जुड़े रहे। वे बैंकाॅक, थाईलैंड, यूके, रवांडा, अफ्रीका समेत अन्य कई देशों में आतंकी विरोधी कार्यक्रमों में सहयोगी रहे।