
Pressure Horn Disadvantages : जयपुर में इन दिनों प्रेशर हॉर्न वाले वाहन राहगीरों और अन्य वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। कई ट्रक, कार, बस और बाइक पर फिल्मी गाने और स्टाइलिश हॉर्न से निकलने वाली तेज आवाज से कई लोगों के सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है। सत प्रावधान होने के बावजूद भी व्यस्तम मार्ग और नो हॉर्न जोन क्षेत्र में भी ऐसे वाहन प्रेशर हॉर्न बजाते हुए निकलते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है। चिकित्सकों के मुताबिक ऐसे हॉर्न से निकलने वाली ध्वनि की तीव्रता तय सीमा से दो गुना अधिक होती है। अचानक प्रेशर हॉर्न बजने से कई बार घबराहट के साथ ही लोगों का संतुलन भी बिगड़ जाता है। इससे एक्सीडेंट का खतरा भी बढ़ जाते हैं। एसएमएस अस्पताल के ईएनटी विभाग में रोजाना ध्वनि से होने वाल समस्या को लेकर रोजाना 5 से 10 प्रतिशत मरीज पहुंच रहे हैं।
ध्वनि प्रदूषण से कम उम्र के लोगों को भी कम सुनाई देने की समस्या हो रही है। पहले यह समस्या बुजुर्गो में देखने को मिलती थी, लेकिन प्रेशर हॉर्न और लगातार ध्वनि प्रदूषण से 30 वर्ष के लोग भी कम सुनाई देने की शिकायत लेकर चिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सप्ताह में पांच दिन 80 डेसीबल से अधिक की आवाज सुन ले तो उसकी सुनने की क्षमता जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रेशर हॉर्न 80 डेसीबल से अधिक आवाज करते हैं।
रामगंज निवासी 34 वर्षीय मोहमद शादाब चांदपोल में एक दुकान पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि यहां दिन भर वाहनों के तेज हॉर्न की आवाज आती रहती है, जिससे लगातार सिर दर्द बना रहता है। बाइक वाले लगातार तेज हॉर्न बजाते हुए चलते हैं। आवाज इतनी तेज होती है कि कान के पर्दे में सनसनाहट शुरू हो जाती है। कई बार तो वाहन चलाते समय तेज हार्न सुनकर कन्फ़्यूज़ हो जाते हैं।
गणगौरी बाजार निवासी 40 वर्षीय टीकाराम मीणा ने बताया कि रोज ऑफिस ई-रिक्शा से जाते हैं। रास्ते में कई बार प्रेशर हॉर्न वाले वाहन गुजरते हैं। कई बार नजदीक ही प्रेशर हॉर्न की आवाज से कान सुन्न हो जाता है। अब कान में सीटी की आवाज आती है, जिसका इलाज चल रहा है। यह भी पढ़ें :
मोटर व्हीकल एक्ट नियम 39/192 के अनुसार कार,बाइक या अन्य किसी भी तरह के वाहन में यदि प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल किया जाता है तो यह ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। प्रेशर हॉर्न बजाने पर 10 हजार रुपए का चालान का प्रावधान है। इसके अलावा अस्पताल, शैक्षणिक संस्थाएं न्यायालय क्षेत्रों में हॉर्न बजाता है, तो 194 एफ के अनुसार 2 हजार रूपए का चालान का प्रावधान है।
सुनने की क्षमता कम होने के साथ साथ टिनिटस की समस्या बढ़ने लगी है। अगर कोई व्यक्ति 80 डेसीबल से अधिक तीव्रता की ध्वनि के बीच 8 से 10 घंटे बिताता है तो उसे चिड़चिड़ेपन, अवसाद, एंग्जाइटी, रक्तचाप, अनिद्रा और हार्ट अटैक का खतरा अधिक बढ़ जाता है। प्रेशर हॉर्न से कान के पर्दे पर अचानक दबाव पड़ता है। इससे कान के पर्दे के पीछे की तीन छोटी-छोटी हड्डियां पर प्रभाव पड़ता है।
-डॉ पवन सिंघल, एचओडी, ईएनटी विभाग
सड़क पर अगर कोई व्यक्ति प्रेशर हॉर्न बजाता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है। हाल ही प्रेशर हॉर्न की 20 से ज्यादा कार्रवाई की गई है।
- सागर डीसीपी (ट्रैफिक)
बाइक में प्रेशर हॉर्न लगवाने का चलन फिर बढ़ने लगा है। कई युवा बाइक में सामान्य हॉर्न को हटवाकर प्रेशर हॉर्न लगवा रहे हैं। अलग दिखने की चाह में कई युवा बाइक में बॉलीवुड गानों की तर्ज पर हॉर्न लगवा रहे हैं।
Updated on:
03 Dec 2024 12:00 pm
Published on:
25 Oct 2024 12:23 pm
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