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Rajasthan JJM Scam : 20 हज़ार करोड़ का घोटाला! अब सामने आई हैरान करने वाली ‘अंदर की बात’

Rajasthan Jal Jeevan Mission Scam latest update : राजस्थान में 20 हज़ार करोड़ का JJM Scam ! अब सामने आई हैरान करने वाली 'अंदर की बात'

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Rajasthan Jal Jeevan Mission Scam latest update

जयपुर।

राज्य की गहलोत सरकार अब जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर घिरती जा रही है। हैरानी की बात ये है कि एक सांसद द्वारा उठाए जा रहे इस गंभीर आरोप पर पुलिस एक अदद एफआईआर तक दर्ज नहीं कर रही है। इस बीच सामने आया है 'हर घर तक नल' पहुंचाने का जल जीवन मिशन अफसरों से लेकर नेताओं तक के लिए मुफीद साबित हो रहा है। इसमें करीब 20 हजार करोड़ के टेंडरों में जलदाय विभाग के आला अफसरों ने जमकर मनमानी की है । चहेती फर्मों को काम दिलाने के लिए टेंडर में मनचाहे तरीके से शर्तें जोड़ीं और हटा दी गई। प्रोजेक्ट साइट विजिट का सर्टिफिकेट लेने की बंदिश रखी गई।

वित्त विभाग ने भी माना कि प्रोजेक्ट साइट विजिट के सर्टिफिकेट लेने की बाध्यता राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम के विपरीत है। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया से इस शर्त को हटाने के आदेश हुए। सवाल यह है कि भले ही कुछ टेंडर निरस्त कर दिए हों, लेकिन गलत निर्णयों को बढ़ावा देने के पीछे कौने-कौन अधिकारी हैं, जिन्हें बचाया जा रहा है। उलटे, सरकारी पानी के लिए लोगों को इंतजार करने को मजबूर कर दिया गया।

हालात और हकीकत

हालात- जलदाय विभाग ने स्वीकृति के लिए जो प्रकरण वित्त विभाग को भेजा, उनमें 42 प्रतिशत तक ज्यादा दर आई, यानि सरकार को आर्थिक नुकसान और चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने की तैयारी थी। वित्त विभाग ने इसे अधिकतम 10 प्रतिशत तक लाने के निर्देश दिए।

हकीकत- जलदाय विभाग के अफसरों को इस आर्थिक नुकसान की जानकारी थी, लेकिन उस समय तक भी न तो टेंडर निरस्त किए और न ही कंपनियों से दर कम कराने की प्रभावी कोशिश की।

हालात- टेंडरों में अब भी अनुमानित लागत से 25 प्रतिशत अधिक दर पर काम सौंपने की तैयारी है। यानि, वित्त विभाग के निर्देशों की अवहेलना।

हकीकत- टेंडर शर्त तय कर स्वीकृत करने तक की प्रक्रिया की फाइल अब भी उन्हीं अफसरों की टेबल से गुजरेगी, जिन्होंने पहले भी इसमें शामिल थे।

हालात- केन्द्र सरकार ने केवल इतना कहा था कि लागत वृद्धि नहीं होनी चाहिए और टेंडर प्रिमियम को स्वीकृत कर देंगे। पर बंदिश यह है कि टेंडर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धी होनी चाहिए।

हकीकत- इसकी आड़ में मूल्य विचलन (प्राइस वेरिएशन) प्रावधान को ही खत्म कर दिया। ऐसे में कंपनियों ने टेंडर में अपेक्षा से ज्यादा दर अंकित कर दी।

हर घर कनेक्शन पहुंचाने का मिशन

जल जीवन मिशन केन्द्र सरकार का प्रोजेक्ट है। इसके तहत हर घर तक जल कनेक्शन पहुंचाना है। प्रदेश में प्रोजेक्ट लागत हिस्सा केन्द्र और राज्य का 50-50 प्रतिशत है।

गरमा चुका मामला

टेंडरों में साइट विजिट का सर्टिफिकेट लेने की बाध्यता रखी थी। इससे निविदा में शामिल फर्म की पहचान हो गई। इससे फर्मों को एक-दूसरे से बातचीत और पूलिंग करने का मौका मिला। नतीजा, निर्धारित दर से 42 प्रतिशत से ज्यादा तक रेट आई थी।

विभाग का इन पर दारोमदार

महेश जोशी, जलदाय मंत्री

सुबोध अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, जलदाय विभाग