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Rajasthan Panchayat Election : साफ़ हुई ‘महिला आरक्षण’ की तस्वीर, निकायों में 33% और पंचायतों में 50% रहेगा रिज़र्वेशन, जानें और क्या हुए बदलाव?

Women Reservation in Rajasthan Election 2026 : राजस्थान निकाय चुनावों में महिलाओं को 33% और पंचायतों में 50% आरक्षण। पार्षद प्रत्याशियों के लिए खर्च सीमा तय, आयोग ने जारी किया करोड़ों का बजट। पूरी गाइडलाइन पढ़ें।
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rajasthan local body election 2026 women reservation

Rajasthan Local Body Election 2026 Women Reservation

राजस्थान में आगामी शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बार के चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं का आरक्षण प्रतिशत और प्रत्याशियों द्वारा किया जाने वाला चुनाव खर्च रहेगा। शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का गणित अलग-अलग तय किया गया है। स्वायत्त शासन विभाग और पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में लॉटरी प्रक्रिया की तैयारियां पूरी कर ली हैं।

महिलाओं को आरक्षण: निकायों में 33% तो पंचायतों में 50%

राजस्थान में इस बार भी शहरी निकाय और पंचायती राज चुनावों में महिला आरक्षण का अनुपात अलग-अलग रहने वाला है।

पंचायती राज चुनाव: पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

शहरी निकाय चुनाव: स्वायत्त शासन विभाग द्वारा आयोजित निकाय चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण ही मिलेगा।

वर्गवार आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणियों में महिलाओं को आरक्षण इसी 33% और 50% के तय अनुपात के आधार पर ही आवंटित किया जाएगा।

स्वायत्त शासन विभाग ने 33 फीसदी महिला आरक्षण के हिसाब से तथा पंचायती राज विभाग ने 50 फीसदी महिला आरक्षण के हिसाब से लॉटरी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्यों नहीं लागू हो पाया 50% आरक्षण?

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में पंचायत और शहरी निकाय दोनों स्तरों पर महिलाओं का आरक्षण 33 से बढ़ाकर 50 फीसदी करने का निर्णय लिया था। हालांकि, शहरी निकायों में 50 फीसदी महिला आरक्षण का मामला कानूनी अड़चनों के कारण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

अदालत से हरी झंडी न मिलने के कारण निकायों में महिला आरक्षण 33 फीसदी पर ही रुका हुआ है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 243 डी (Article 243D) में संशोधन के बाद ही शहरी निकायों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है।

वर्तमान में बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में शहरी निकायों में 50% महिला आरक्षण लागू है।

पार्षद प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च की सीमा बढ़ी

राज्य निर्वाचन आयोग ने विभिन्न निकायों के लिए प्रत्याशी खर्च सीमा का नया ढांचा तय कर दिया है।

नगर निगम पार्षद: प्रत्याशी चुनाव प्रचार पर अधिकतम ₹3.50 लाख (3.5 लाख) तक खर्च कर सकेंगे।

नगर परिषद पार्षद: चुनाव खर्च की सीमा ₹50 हजार बढ़ाकर अब ₹2.50 लाख (2.5 लाख) कर दी गई है।

नगर पालिका पार्षद: पार्षद प्रत्याशी के लिए खर्च की सीमा ₹1.50 लाख (1.5 लाख) रखी गई है।

कड़े नियम: लाउडस्पीकर बैन, गाड़ियों के लिए स्पेशल परमिशन

निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं।

चुनावी खर्च का ब्योरा: चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सभी प्रत्याशियों को 15 दिन के भीतर अपने पूरे चुनावी खर्च का विस्तृत हिसाब आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

मतदान के दिन वाहनों का उपयोग: यदि मतदान के दिन कोई प्रत्याशी वाहन/गाड़ी का इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे इसके लिए निर्वाचन अधिकारी से अलग से लिखित अनुमति लेनी होगी।

लाउडस्पीकर पर पूर्ण प्रतिबंध: चुनावी कार्यालयों पर लाउडस्पीकर लगाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन करने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

आयोग ने जारी किया ₹29.64 करोड़ का बजट

चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने और चुनावी कर्मचारियों के टीए-डीए (TA-DA) व अन्य व्यवस्थाओं के लिए आयोग ने भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया है।

10 नगर निगमों के लिए: निर्वाचन अधिकारियों को कुल ₹10.31 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

नगर पालिकाओं व नगर परिषदों के लिए: ₹19.33 करोड़ का बजट जारी किया गया है।

कुल चुनावी आवंटन: राज्य निर्वाचन आयोग ने कुल मिलाकर ₹29.64 करोड़ की राशि फील्ड अधिकारियों को जारी कर दी है।