
इस तरह ध्वस्त किए जा रहे पुराने निर्माण (फोटो: पत्रिका)
जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे में नगर निगम प्रशासन की लापरवाही पर हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए ऐतिहासिक स्वरूप को संरक्षित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि शहर का मूल हैरिटेज लुक और पारंपरिक सौंदर्य इसी तरह अतिक्रमण के कारण प्रभावित होता रहा, तो जयपुर से यूनेस्को का प्रतिष्ठित दर्जा भी छिन सकता है।
न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह और न्यायाधीश संदीप तनेजा की खंडपीठ ने जितेंद्र शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए निगम आयुक्त को आदेश दिए है कि परकोटा क्षेत्र में बिना सक्षम मंजूरी या अप्रूवल के चल रहे तमाम अवैध निर्माणों को तुरंत प्रभाव से रोका जाए और शहर के मूल हैरिटेज लुक को पुनः बहाल किया जाए। अवैध निर्माणों को लेकर अदालत ने सीधे नगर निगम व आयुक्त की जवाबदेही तय की है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता उमेश व्यास ने अदालत में बताया कि निगम अधिकारियों की शह और अनदेखी के चलते परकोटे के मुख्य बाजारों की विरासत छिन्न-भिन्न हो रही है। इस पर खंडपीठ ने प्रथम चरण के तहत जयपुर के चार सबसे व्यस्त और प्रमुख मार्गों पर तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा, किशनपोल बाजार, चौड़ा रास्ता, जौहरी बाजार और चांदपोल बाजार से छोटी चौपड़ होते हुए त्रिपोलिया गेट व बड़ी चौपड़ तक जाने वाले मुख्य मार्ग पर अवैध तरीके से किए गए निर्माणों को बिना किसी ढिलाई के फौरन बंद कराया जाए और गुलाबी नगरी के पारंपरिक सौंदर्य को वापस लाया जाए।
कोर्ट ने कहा कि नवंबर 2027 में जयपुर स्थापना के 300 वर्ष पूरे करने जा रहा है और गुलाबी नगरी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। निगम की अनदेखी के कारण शहर का मूल रूप बिगड़ रहा है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 7 सितंबर तय करते हुए संबंधित प्राधिकारियों से इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है।
राजधानी के परकोटा क्षेत्र में अब पुरानी हवेलियां बच नहीं रहीं, उन्हें तोड़कर नए व्यावसायिक परिसर खड़े किए जा रहे हैं। जहां कभी झरोखे, छज्जे और पारंपरिक स्थापत्य जयपुर की पहचान थे, वहां अब कांच के फ्रंट, शटर और नई मंजिलें दिखाई दे रही हैं। आवासीय भवनों का उपयोग बदला जा रहा है और देखते ही देखते पूरा ढांचा व्यावसायिक हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सब उस शहर में हो रहा है, जिसे उसकी ऐतिहासिक बनावट और स्थापत्य के लिए यूनेस्को ने विश्व विरासत का दर्जा दिया है। नए निर्माण, परकोटे के मूल स्वरूप से मेल ही नहीं खाते। यानी बाहर दीवारें आज भी गुलाबी हैं, लेकिन अंदर का जयपुर लगातार बदल रहा है।
हैरिटेज भवनों को बचाने और उनके स्वरूप में बदलाव पर निगरानी के लिए बनी हैरिटेज सेल का इस्तेमाल लगभग खत्म हो चुका है। नतीजा यह है कि संरक्षण की व्यवस्था कागजों में है और जमीन पर पुराने निर्माणों की जगह नए निर्माण ले रहे हैं।
परकोटा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा किशनपोल जोन में आता है, लेकिन जो अधिकारी आंख मूंदकर बैठे रहते हैं। मुख्य बाजारों में ही मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है। पहले तो निगम निर्माण को होने देता है। शिकायत होने पर पहला नोटिस, दूसरा नोटिस और फिर अंतिम नोटिस जारी करता है। इस दौर में ज्यादातर अवैध निर्माण पूरे हो जाते हैं और कुछेक को सील कर दिया जाता है। बाद में इन अवैध इमारतों की सील चुपचाप खुल जाती है।
Updated on:
08 Aug 2026 09:33 am
Published on:
08 Aug 2026 09:33 am
