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राजस्थान: फिर बढ़ेंगे मंत्रियों-विधायकों के वेतन-भत्ते! जाने किस रफ़्तार से बढ़ रही ‘माननीयों’ की सैलरी

राजस्थान की गहलोत सरकार ( Ashok Gehlot Government ) एक बार फिर मंत्रियों-विधायकों के वेतन-भत्ते ( Ministers MLA Salary Allowances benefits ) बढ़ाने की तैयारी में है। यदि सब कुछ सही रहा तो जल्द ही सरकार विधानसभा में विधेयक लाकर इसे मंज़ूरी दिलवा सकती है।

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Rajasthan Ministers MLA Salary Allowances benefits, Interesting Facts

जयपुर।

राजस्थान की गहलोत सरकार एक बार फिर मंत्रियों-विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने की तैयारी में है। यदि सब कुछ सही रहा तो जल्द ही सरकार विधानसभा में विधेयक लाकर इसे मंज़ूरी दिलवा सकती है।


'फॉर्मूले' पर हो रहा मंथन
जानकारी के अनुसार मंत्री, मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक, विधायक व पूर्व विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार बार-बार विधेयक लाने से बचने के लिए कोई फार्मूला तय करने पर भी विचार कर रही है, जिस पर शनिवार को भी मंथन हुआ।


मंत्रियों व मंत्री का दर्जा प्राप्त व्यक्तियों के लिए अलग विधेयक लाया जाएगा, जबकि विधायक-पूर्व विधायकों के लिए अलग विधेयक लाया जाएगा।


सूत्रों का कहना है कि विधेयकों के ड्राफ्ट तैयार होने के बाद उनको केबिनेट से मंजूरी मिल गई, तो सोमवार को विधानसभा में पेश हो सकते हैं। विधानसभा का सत्र एक दिन बढाए जाने की भी अटकल हैं। इन सभी के वेतन-भत्तों पर विचार के लिए एक मंत्रिमंडलीय समिति भी बनाई गई है, जिसने भी शनिवार को अधिकारियों से चर्चा की। मंत्रिमंडलीय समिति ने विधायकों के लिए प्रस्तावित नए फ्लैट्स के निर्माण को लेकर विचार किया है।

वेतन-भत्तों पर राजे कार्यकाल में खर्च हुए 90 करोड़

वसुंधरा सरकार ने अपने साढ़े पांच वित्तीय वर्षों के दौरान सूबे के 200 विधायकों के वेतन-भत्तों पर 90.79 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इस अवधि में ही राज्य के पूर्व विधायकों की पेंशन की मद में सरकारी खजाने से 80.32 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। ये खुलासा मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ की ओर से लगाए गए सूचना के अधिकार (RTI) की रिपोर्ट में हुआ था।


राजस्थान विधानसभा सदस्यों के वेतन-भत्तों और पूर्व विधायकों की पेंशन के ये आंकड़े एक अप्रैल 2013 से 26 सितंबर 2018 तक की अवधि के हैं। आरटीआई से मिली जानकारी से भी सामने आया था कि वित्त वर्ष 2013-14 में राजस्थान के विधायकों के वेतन-भत्तों पर खर्च राशि 12.15 करोड़ रुपये के स्तर पर थी, जो वित्तीय वर्ष 2017-18 में डेढ़ गुना से भी ज्यादा बढ़कर 18.74 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।

वहीं, पांच वित्तीय वर्षों की इस अवधि में राजस्थान के पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन पर होने वाला सरकारी भुगतान लगभग तीन गुना बढ़ गई। राजस्थान में वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान पूर्व विधायकों की पेंशन पर खर्च रकम 7.67 करोड़ रुपये थी, जो वित्तीय वर्ष 2017-18 में बढ़कर 22.59 करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी।


24 बार बढ़ाया गया वेतन!

जानकारी के अनुसार राजस्थान विधानसभा के गठन के बाद से अब तक लगभग 24 बार विधायकों के वेतन-भत्ते बढाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार विधानसभा के गठन के समय विधायक का वेतन 251 रुपए प्रतिमाह था, वहीं वर्तमान समय में प्रति विधायक को 1 लाख 25 हजार रुपए प्रतिमाह मिल रहा है। इसके अलावा विभिन्न मदों पर भत्ते अलग से हैं।

जानकारी के अनुसार विधानसभा के गठन के समय 1952 में 251 रुपए प्रतिमाह वेतन था, जो 2010 में बढ़कर 64 हजार रुपए प्रतिमाह हो गया। इसके बाद 2012 में वेतन बढ़कर 82 हजार 500 रुपए प्रतिमाह, 2015 में 92 हजार 500 रुपए प्रतिमाह, 2016 में 92 हजार 500 रुपए प्रतिमाह और 2017 में 1 लाख 25 हजार प्रतिमाह हो गया।