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राजस्थान में एमपी-एमएलए के खिलाफ 51 मुकदमे, अब इन लंबित केसों की होगी तेजी से सुनवाई, सरकार ने दी हाईकोर्ट को जानकारी

Rajasthan High Court : राजस्थान सरकार ने सांसद और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों में जल्द सुनवाई पूरी कराने के लिए लोक अभियोजकों को बेवजह तारीख नहीं लेने की हिदायत दी है।
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जयपुर

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Sanjay Kumar Srivastava

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Updated: 10 Apr 2025, 11:00 AM IST

Rajasthan MPs and MLAs 51 Criminal Cases Now these Pending Cases Heard Quickly Government Gave information to High Court

Rajasthan High Court : राजस्थान सरकार ने सांसद और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों में जल्द सुनवाई पूरी कराने के लिए लोक अभियोजकों को बेवजह तारीख नहीं लेने की हिदायत दी है। सरकार की ओर से बुधवार को हाईकोर्ट में यह जानकारी दी गई, जिस पर कोर्ट ने इससे संबंधित आदेश पेश करने के लिए सरकार को समय देते हुए सुनवाई 12 मई तक टाल दी। प्रदेश में सांसद-विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों की संख्या 51 बताई जा रही है।

सभी लोक अभियोजकों को दिशा निर्देश जारी

मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव व न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई की। सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों में सुनवाई में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार ने सभी लोक अभियोजकों को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी लोक अभियोजकों को इन मामलों में संबंधित न्यायालयों को पूर्ण सहयोग करने और बेवजह सुनवाई टालने का आग्रह नहीं करने की हिदायत दी गई है।

लंबित मामलों की जानकारी दी

उधर, हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल की ओर से भी सांसद-विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश कर दिए जाने की जानकारी कोर्ट को दी गई, लेकिन रिपोर्ट अभी तक सरकार को नहीं मिली है। इस पर कोर्ट ने सरकार को उसकी ओर से जारी आदेश पेश करने का आदेश देते हुए सुनवाई टाल दी।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही निगरानी

हाईकोर्ट ने 2023 में एमपी-एमएलए से जुड़े आपराधिक प्रकरणों के निस्तारण पर निगरानी के लिए स्वप्रेरणा से यह याचिका दर्ज की। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीशों से कहा था कि वे इन केसों के संबंध में याचिका दर्ज कर ट्रायल की स्थिति की नियमित मॉनिटरिंग करें। हाईकोर्ट इन केसों के मामले में संबंधित न्यायालयों से समय-समय पर ट्रायल की रिपोर्ट ले और जरूरत होने पर सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाएं।

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