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Farmer Welfare: राजस्थान के के 66.56 लाख किसानों को 665 करोड़ रुपए से अधिक की राशि आज होगी ट्रांसफर

DBT transfer: मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि: 5 किस्तों में 2726 करोड़, किसानों को बड़ा सहारा। अब 66.56 लाख किसानों को छठी किस्त का इंतजार, 665 करोड़ होंगे ट्रांसफर।

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जयपुर

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Rajesh Dixit

Apr 21, 2026

Mukhyamantri Kisan Samman Nidhi Yojana: जयपुर. राजस्थान में किसानों को आर्थिक मजबूती देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ लगातार प्रभावी साबित हो रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लागू इस योजना के तहत अब तक पांच किस्तों में कुल 2,726 करोड़ रुपये किसानों के खातों में सीधे हस्तांतरित किए जा चुके हैं। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को आर्थिक संबल मिला है और उनका जीवन पहले की तुलना में अधिक सुगम हुआ है।

योजना की छठी किस्त बुधवार को जोधपुर जिले के ओसियां में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में जारी की जाएगी। इस दौरान राज्य के 66.56 लाख किसानों को 665 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जाएगी। गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत 30 जून 2024 को टोंक से की गई थी, जब पहली किस्त के रूप में 65 लाख से अधिक किसानों को लगभग 653 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे।

इसके बाद दिसंबर 2024 में दूसरी और तीसरी किस्त एक साथ जारी की गई, जिसमें कुल 702 करोड़ रुपये किसानों को मिले। वहीं, चौथी किस्त अक्टूबर 2025 में नदबई में और पांचवीं किस्त जनवरी 2026 में सिरोही में जारी की गई, जिनमें क्रमशः 718 करोड़ और 653 करोड़ रुपये वितरित किए गए।

राज्य सरकार इस योजना के जरिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अतिरिक्त सहायता प्रदान कर रही है। जहां केंद्र सरकार किसानों को सालाना 6,000 रुपये देती है, वहीं राज्य सरकार की इस योजना से किसानों को अतिरिक्त 3,000 रुपये मिल रहे हैं। इस तरह अब किसानों को कुल 9,000 रुपये प्रतिवर्ष मिल रहे हैं। सरकार भविष्य में इस राशि को बढ़ाकर 12,000 रुपये सालाना करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

योजना का लाभ उन किसानों को मिलता है जिनके पास 1 फरवरी 2019 से पहले कृषि भूमि है या विरासत में प्राप्त हुई है। एक परिवार से केवल एक ही सदस्य को इसका लाभ दिया जाता है। पंजीकरण के लिए किसान पीएम-किसान पोर्टल, ई-मित्र या कॉमन सर्विस सेंटर की मदद ले सकते हैं।

यह योजना न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को भी बढ़ा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।