
ऐसे हैं गहलोत, 41 साल पहले विवाह में दहेज का सामान भी छोड़ गए थे, जयपुर में है ससुराल, एक रुपया लेते हैं शगुन में
जितेन्द्र सिंह शेखावत / जयपुर। प्रदेश के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे अशोक गहलोत का ससुराल जयपुर में मोतीडूंगरी रोड के आनंदपुरी में है। 41 साल पहले विवाह करने आए तब वे दहेज का सामान छोड़ गए थे और टीके के शगुन में केवल एक रुपया लिया था। बारात लेकर आए, लेकिन घोड़ी पर बैठकर तोरण नहीं मारा था। गहलोत के मुख्यमंत्री बनने की शुक्रवार को हुई घोषणा के बाद उनके ससुराल में खुशी का माहौल है। खुशी में ढोल नगाड़ों के साथ आतिशबाजी की गई और मोती डूंगरी गणेशजी के चढ़ाए मिठाई के लड्डू बांटे गए।
गहलोत के सास ससुर अब नहीं है लेकिन उनके परिजन आदि का सारा परिवार खुशी से सरोबार है। गहलोत की पत्नी के भाई नरेन्द्र व देवेन्द्र चंदेल ने बताया कि जीजाजी के पिता बाबू लक्ष्मण सिंह और उनके पिता रामस्वरुप चंदेल की मित्रता थी। सुनीता दीदी ने महारानी कॉलेज से पढ़ाई पूरी की तब दीदी का रिश्ता अशोकजी से पक्का हुआ।
27 नवम्बर 1977 को अशोकजी की बरात जोधपुर से आई, जिसे सी-स्कीम के कमल निवास में ठहराया गया था। अशोक जी ने दहेज नहीं देने की शर्त पर विवाह किया था। पलंग व कुछ फर्नीचर बनवाया जिसे भी गहलोत ने स्वीकार नहीं किया और यहीं छोड़ गए। दहेज में स्टील और पीतल के बर्तन भी नहीं ले गए। विवाह के बाद से वे अब तक शगुन के बतौर केवल एक रुपया ही लेते हैं।
नरेन्द्र की पुत्री के विवाह में तिलक लगाकर दिए लिफाफे को खोला और उसमें से एक रुपया निकाल कर जेब में रखा। गहलोत के ससुर रामस्वरुप चंदेल जयपुर नगर परिषद में कांग्रेस के चार बार पार्षद रहे थे। उस समय गहलोत एनएसयूआइ में थे। गांधीवाद विचारधारा के रामस्वरुप चंदेल रहे तब तक गहलोत होली और दीपावली के अलावा मुख्यमंत्री या किसी पद को प्राप्त करने पर आशीर्वाद लेने जरूर आते रहे।
Updated on:
15 Dec 2018 09:15 pm
Published on:
15 Dec 2018 09:15 pm
