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Rajasthan News: कोटा में सबसे कम और बाड़मेर में सबसे ज्यादा हो रही प्रसूताओं की मौत, जानिए क्या है हैरान करने वाली वजह ?

राजस्थान में पिछले 5 वर्षों में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है। प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर होने वाली माताओं की मृत्यु के ग्राफ में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

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एआई से बनाई गई तस्वीर

एआई से बनाई गई तस्वीर

राजस्थान में पिछले 5 वर्षों में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है। प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर होने वाली माताओं की मृत्यु के ग्राफ में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 113 पर था, वहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर 86 पर आ गया है। कोटा में मातृ मृत्यु दर के मामले में सबसे कम है। वहीं बाड़मेर में सबसे ज्यादा मामले सामने आए है।

राजस्थान में 5 वर्षों में मातृ मृत्यु दर का गिरता ग्राफ

(प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर), प्रतिशत/स्तर

2020-21: 113

2021-22: 105

2022-23: 102

2023-24: 97

2024-25 (अनुमानित): 91

2025-26 (वर्तमान अपडेट): 86

बाड़मेर-जैसलमेर में सबसे ज्यादा स्थिति खराब..

आंकड़े बताते है कि सीमावर्ती और रेतीले जिलों में आज भी प्रसव के दौरान माताएं दम तोड़ रही हैं। बाड़मेर जिला पूरे राज्य में सबसे संवेदनशील स्थिति में है। यहां मातृ मृत्यु दर प्रति 1 लाख जीवित जन्म पर 162 से 168 के बीच है। जैसलमेर में भी मातृ मृत्यु दर 155 से 160 के बीच है। इन क्षेत्रों में बिखरी हुई आबादी और समय पर क्रिटिकल केयर न मिल पाना मृत्यु दर बढ़ने की मुख्य वजह है।

सर्वाधिक मातृ मृत्यु दर वाले 5 जिले

जिला (प्रति लाख जन्म पर मृत्यु दर) प्रतिशत/स्तर (राज्य राज्य औसत की तुलना में)

  1. बाड़मेर 162 - 168 राज्य औसत से लगभग 95% अधिक
  2. जैसलमेर 155 - 160 उच्च जोखिम श्रेणी
  3. धौलपुर 148 - 152 संस्थागत प्रसव में सुधार की आवश्यकता
  4. जालौर 140 - 145 बुनियादी ढांचे की कमी
  5. करौली 135 - 138 उच्च एनीमिया दर

आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में ​हालात खराब

करौली, सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में भी मातृ मृत्यु दर काफी अधिक बनी हुई है। इन क्षेत्रों में एनीमिया, कुपोषण और प्रसव के दौरान जटिलताएं बड़ी समस्या हैं। कई गांवों में आज भी गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पाता। आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य ढांचे की कमजोरी भी स्थिति को प्रभावित कर रही है।

न्यूनतम मातृ मृत्यु दर वाले टॉप 5 जिले

जिला (प्रति लाख जन्म पर मृत्यु दर) राज्य औसत की तुलना में

  1. कोटा 58 - 62 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (राष्ट्रीय लक्ष्य के करीब)
  2. जयपुर 62 - 65 उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधाएं
  3. अजमेर 66 - 70 प्रभावी मॉनिटरिंग
  4. सीकर 72 - 75 उच्च जागरूकता स्तर
  5. झुंझुनूं 74 - 78 संस्थागत प्रसव का उच्च प्रतिशत

कोटा और जयपुर में सुरक्षित प्रसव सबसे ज्यादा

एक तरफ जहां कुछ जिले संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हाड़ौती के केंद्र कोटा ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय लक्ष्यों के करीब पहुंचने में सफलता पाई है। कोटा में मातृ मृत्यु दर महज 58-62 है। राजधानी जयपुर भी 62-65 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर है, जिसका मुख्य कारण यहां उपलब्ध उत्कृष्ट और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं हैं।

बड़े शहरों में स्वास्थ्य सुविधाओं का असर

जयपुर, कोटा और अजमेर जैसे शहरों में आधुनिक अस्पताल, विशेषज्ञ डॉक्टर और बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम के कारण मातृ मृत्यु दर कम रही है। वहीं सीकर और झुंझुनूं में महिलाओं में जागरूकता और नियमित प्रसव पूर्व जांच के कारण सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। राजसमंद, पाली और अलवर में भी सुरक्षित प्रसव सेवाओं में सुधार का असर देखने को मिला है।

हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर भी बेहतर स्थिति में

हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में मातृ सुरक्षा योजनाओं और प्रसव पूर्व जांच अभियानों का सकारात्मक असर दिखाई दिया है। यहां स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव स्तर तक निगरानी और समय पर रेफरल व्यवस्था मजबूत की गई है। इसके चलते जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को समय रहते उपचार मिल पा रहा है।

विशेषज्ञ बोले- अभी और सुधार की जरूरत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान ने मातृ मृत्यु दर कम करने में अच्छी प्रगति की है, लेकिन अभी भी कई जिलों में गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, एंबुलेंस सेवाओं की मजबूती और प्रसव पूर्व जांच को और बेहतर बनाने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में राजस्थान राष्ट्रीय स्तर के लक्ष्य को हासिल कर सकता है।