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ढाई लाख SIM और पौने दो लाख IMEI नंबर बंद किए Rajasthan पुलिस ने, सिम जारी रखने के लिए ये काम करें, नहीं तो बंद होगी

Sim or Mobile Block in Rajasthan:बैंक केवाईसी के नाम पर, सस्ते वाहन और फर्नीचर बेचने के नाम पर, घर बैठे काम करने के नाम पर सबसे ज्यादा फ्रॉड होता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

Sim or Mobile Block in Rajasthan: कोरोना के बाद तो मानों साइबर ठगी को ऐसे पंख लगे हैं राजस्थान में कि पूरे देश में राजस्थान नंबर वन आ चुका है। पहले किसी समय झारखंड़ राज्य का जामताड़ा इलाका साइबर ठगों के लिए स्वर्ग था, लेकिन अब यह चौथे नंबर पर जा चुका है। अब नया साइबर ठगों का नया इलाका मेवात बन चुका है। मेवात का बड़ा इलाका राजस्थान और हरियाणा में हैं। हरियाणा से ज्यादा राजस्थान में फैला होने के कारण ठगी यहीं से सबसे ज्यादा हो रही है। साइबर ठगों पर अब लगातार नजर रखने के बाद पहली बार पुलिस ने बड़ी संख्या में सिम बंद किए हैं और आईएमईआई नबर ब्लॉक किए हैं। चौदह महीनों के दौरान अलवर, भरतपुर, धौलपुर जिलों की पुलिस ने मिलकर दो लाख 62000 से ज्यादा सिम बंद कराए हैं। इसके अलावा अलवर और भरतपुर में करीब पौने दो लाख आईएमईआई नंबर भी बंद कराए गए हैं।

ऐसा कोई बचा नहीं जिसे मेवात के ठगों ने ठगा नहीं, बीस राज्यों को ठग चुका है मेवात का छोटा सा इलाका...
मेवात का इलाके में इतने ठग हो गए हैं कि दो साल में देश के करीब बीस राज्यों को ये लोग ठग चुके हैं। दो साल के दौरान दर्जनों बार दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तराखंड, जम्मू समेत देश के बीस राज्यों की पुलिस राजस्थान आ चुकी है लोकेशन सर्च करते करते...। मेवात में बैठे साइबर ठगों ने इन राज्यों के लोगों को जबरदस्त तरीकों से ठगा है।

फेसबुक के विज्ञापन, सोशल मीडिया पर रील्स और बस आसान शिकार तैयार.....
भरतपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने बताया कि सोशल मीडिया पर कई तरह के भ्रामक विज्ञापन और सूचनाएं दिए जाते हैं जिनमें ना चाहते हुए भी साइबर ठगों के जाल में लोग फंस जाते हैं। यही कारण है कि बैंक केवाईसी के नाम पर, सस्ते वाहन और फर्नीचर बेचने के नाम पर, घर बैठे काम करने के नाम पर सबसे ज्यादा फ्रॉड होता है। शुरुआत कुछ रुपयों से होती है और फिर रकम बढ़ती जाती है। आईजी राहुल प्रकाश ने कहा कि आप खुद सोचिए..... जो बाइक अस्सी हजार की है वह पच्चीस हजार में कैसे कोई दे सकता है...। सस्ता माल यानी धोखा होना तय है। इसी तरह अन्य विज्ञापन और सूचनाएं भी हैं।

असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में थोक के भाव मिलते सिम, पूरे देश में यहीं से सप्लाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन ठगी को अंजाम देने के लिए असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से फर्जी पते पर प्री,एक्टिवेटेड सिम लेकर आते हैं। उन सिम को यहां एक्टिवेट किया जाता है। इसके बाद उन्हीं नंबरों से कॉल की जाती है। साल 2023 में अलवर पुलिस ने 80 हजार सिम कार्ड ब्लॉक कराए थे। वहीं साल 2024 में अभी दो माह के दौरान 10 हजार 183 सिम ब्लॉक कराया गया है। भरतपुर पुलिस ने फर्जी पते वाली 1 लाखए 72 हजार 392 सिम और 1 लाख 85 हजार 42 मोबाइल के आईएमईआई नंबर ब्लॉक कराए हैं। जो नंबर बंद कराए गए हैं, उनसे पुलिस को 78 हजार 800 साइबर क्राइम की शिकायतें प्राप्त हुईं थीं।

बैंक अधिकारियों और अफसरों का कहना है कि चाहे किसी भी तरह का कॉल आए लेकिन अपना ओटीपी बेहद सोच समझकर ही शेयर करें। अगर ओटीपी शेयर ना हो तो सत्तर फीसदी फ्रॉड से बचा जा सकता है।