
जयपुर। राजस्थान के सियासी घटनाक्रम में अशोक गहलोत सरकार में नम्बर दो पर काबिज नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने आलाकमान के खिलाफ जिस तरह से मोर्चा संभाला उसकी सियासी हलकों में खासी चर्चा है।
पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में सीएमआर में होने वाली बैठक के समानांतर बैठक और विधायकों के इस्तीफे की पटकथा भी यहीं लिखी गई। पार्टी के राजस्थान प्रभारी अजय माकन पर जिस तरह से धारीवाल हमलावर रहे उसके भी निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। नगरीय विकास विभाग जैसे मलाईदार विभाग के मुखिया की इस घटनाक्रम में धारीवाल की मुख्यमंत्री गहलोत के प्रति वफादारी भी खुल कर सामने आई है।
प्रमोद कृष्णम और राजेन्द्र गुढ़ा का आरोप, दोनों मंत्रियों ने 4 हजार करोड़ कमाए
मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने दो साथी मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम के लगाए आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि आचार्य प्रमोद ने मंत्रियों पर 400 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, लेकिन यह आंकड़ा 4000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। इन्होंने जनता को लूट लिया।
कोटा-जयपुर में प्रोजेक्ट्स की भरमार
नगरीय विकास एवं आवासन और स्वायत्त शासन विभाग में पिछले चार साल में 50 हजार करोड़ रुपए के काम का प्लान बना। सबसे ज्यादा खर्चा कोटा और जयपुर में हो रहा है। तीसरे नम्बर पर जोधपुर है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही प्रदेश के 213 शहरों में डवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर करीब 20 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। खास यह है कि इसमें अकेले कोटा शहर में 3350 करोड़ और जयपुर शहर में 3721 करोड़ रुपए के कार्य हैं। पहली बार है जब यूडीएच मंत्री के शहर में एक समय में इतनी मोटी राशि के प्राजेक्ट्स निर्माणाधीन हो। जितने ज्यादा प्रोजेक्ट, उतना ही ज्यादा बजट।
सीएम कह चुके फिर यूडीएच मंत्री होंगे धारीवाल
सीएम अशोक गहलोत दो बार सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि कांग्रेस सरकार बनती है तो धारीवाल की फिर यूडीएच मंत्री होंगे। गत18 सितंबर को जोधपुर में आयोजित कार्यक्रम से पहले जयपुर में प्रशासन शहरों की ओर एवं गांवों के संग अभियान की शुरुआत में भी गहलोत ने यह बात कही थी।
ये भी कारण तो नहीं
धारीवाल की लम्बी राजनीतिक पारी रही है। अब उम्र भी 78 साल से ज्यादा हो रही है। चर्चा है कि उम्र के इस पड़ाव पर शायद ही आगे चुनाव लड़े। यह भी एक कारण हो सकता है कि सीधे तौर पर कांग्रेस आलाकमान के भेजे प्रभारी के खिलाफ मोर्चा खोलने से गुरेज नहीं किया।
- पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और गहलोत सरकार के बीच खाई बढ़ती है तो गहलोत खेमा फिर ताकत दिखा सकता है। ऐसे में धारीवाल ही आगे आ सकते हैं।
- गहलोत मुख्यमंत्री पद से हटने पर बाकी मंत्रियों की भी कुर्सी हिल सकती थी। ऐसे में मंत्रियों का बजट गड़बड़ाने के आसार बनने वाली स्थिति से बचने के लिए भी मंत्री एकजुट हुए।
- धारीवाल सीएम के नजदीकी हैं, इसलिए भी विधायक मंत्री उनकी बात सुनते हैं।
Published on:
28 Sept 2022 03:07 pm
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