
जयपुर।
राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता के तौर पर पहचान बनाने वाले देवी सिंह भाटी एक और फिर चर्चा में हैं। पीएम मोदी के 'सिपहसालार' केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पर पार्टी विरोधी गतिविधियों का सनसनीखेज़ आरोप लगाते हुए भाटी ने भाजपा का वर्षों पुराना साथ छोड़ दिया है। नाराज़ भाटी ने पार्टी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर दी है।
बहरहाल ये कोई पहली बार नहीं है जब देवी सिंह भाटी सुर्ख़ियों में बने हुए हैं। इससे पहले अपने तेज़-तर्रार अंदाज़ और बेबाक बोल के लिए भाटी खबरों में रहे हैं। पर इन सभी के बीच भाटी के पूरे राजनितिक जीवन के दौरान उनका परिवेश भी चर्चा में रहा है। इनमें भी सबसे ख़ास है उनके सिर की कैप।
शायद ही ऐसा कोई मौक़ा रहता है जब देवी सिंह भाटी को बिना कैप के देखा जा सकता है। ऐसा कह सकते हैं कि इस विशेष तरह की कैप से ही भाटी की विशेष पहचान बनी हुई है।
'आंदोलन' के दौरान पहली बार पहनी कैप
अपने मीडिया इंटरव्यूज़ में देवी सिंह भाटी बता चुके हैं कि उन्होंने सबसे पहले सामाजिक न्याय मंच आंदोलन के दौरान कैप पहनी थी। तब से शुरू हुआ ये शौक न जाने कब की कब आदत बन गया, ये खुद उन्हें ही मालूम नहीं चला। इसके बाद देखते ही देखते उनके समर्थकों ने भी ऐसी कैप पहननी शुरू कर दी।
स्वास्थ्य ठीक रखने का भी है कनेक्शन
सिर पर कैप लगाए रखना देवी सिंह भाटी के लिए जैसे स्टाइल आइकन बना हुआ है। हालांकि टोपी लगाए रखने के पीछे उनके स्वास्थ्य कारण भी छिपे हुए हैं। एक इंटरव्यू में जब उनसे हमेशा कैप लगाए जाने को लेकर सवाल पूछा गया तब उन्होंने बताया था कि उनको अस्थमा और जुकाम की काफी परेशानी रहती है। लिहाज़ा इसे नियंत्रण में रखने के लिए उन्होंने कैप पहनना शुरू किया।
.... और 'भाटी' कैप बन गई ट्रेंड
राजनीति के कद्दावर नेता देवी सिंह भाटी को विशेष तरह की कैप में देखकर उनके विचारों से सहमत होने वालों और उनके शुभचिंतकों ने भी इसी तरह की कैप लगानी शुरू कर दी। देखते ही देखते 'भाटी' कैप का अचानक से ट्रेंड चल पड़ा। उनके कई फ़ॉलोअर्स ऐसे बन गए जिन्होंने इसी तरह की कैप पहनना शुरू कर दिया। इसी के बाद से इस तरह की 'भाटी' कैप की मार्मेट में भी डिमांड बढ़ गई।
Published on:
17 Mar 2019 02:07 pm
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