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Rajasthan: रूफटॉप सोलर के साथ घर बनेगा ‘मिनी ग्रिड स्टेशन’, मिलेगी 24 घंटे बिजली, जानें स्कीम

अब घरों की छतों पर लगने वाले सोलर पैनलों के साथ बैटरी स्टोरेज सिस्टम (पावर बैंक) लगाना भी जरूरी हो सकता है। केंद्र सरकार रूफटॉप सोलर के साथ बैटरी स्टोरेज को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है।

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जयपुर

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Anand Prakash Yadav

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भवनेश गुप्ता

Nov 12, 2025

पावर बैंक से 24 घंटे मिलेगी बिजली, पत्रिका फोटो

जयपुर.अब घरों की छतों पर लगने वाले सोलर पैनलों के साथ बैटरी स्टोरेज सिस्टम (पावर बैंक) लगाना भी जरूरी हो सकता है। केंद्र सरकार रूफटॉप सोलर के साथ बैटरी स्टोरेज को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है। इसके पीछे मंशा है कि दिन में सोलर पैनल से बनने वाली बिजली को बैटरी में स्टोर किया जाए ताकि 24 घंटे में घर में उपयोग के लिए बिजली उपलब्ध हो।

राज्यों से मांगे सुझाव

केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर राज्यों से राय मांगी है। राजस्थान से विशेष रूप से चर्चा की गई है, क्योंकि देश में सौर ऊर्जा उत्पादन में राजस्थान अव्वल है। यहां 18,000 मेगावाट से ज्यादा रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित है। ऐसे में यदि यह नीति लागू होती है तो इसका सबसे बड़ा असर राजस्थान पर पड़ेगा। मंत्रालय ने ऊर्जा विभाग और अक्षय ऊर्जा निगम से राय मांगी है कि बैटरी सिस्टम की अनिवार्यता कितनी व्यावहारिक होगी और उपभोक्ता को इसका कितना भार उठाना चाहिए। चर्चा के बाद नीति का ड्राट और सब्सिडी मॉडल तय होगा।

फायदे के दावे

दिन में बनी सौर ऊर्जा बैटरी में स्टोर रहेगी, जिससे रात के समय महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम होगी। दिन में जब बड़ी मात्रा में सौर ऊर्जा ग्रिड में जाती है, तो वोल्टेज असंतुलन और ओवरलोड जैसी दिक्कतें आती हैं। बैटरी सिस्टम इन्हें कम करेगा। बिजली गुल होने या ग्रिड फेल की स्थिति में घरों में बैकअप बिजली उपलब्ध रहेगी। सौर ऊर्जा का उपयोग केवल दिन तक सीमित नहीं रहेगा, जिससे अक्षय ऊर्जा का दायरा बढ़ेगा।

यह हैं चुनौतियां…

लागत बड़ी बाधा: एक घरेलू बैटरी सिस्टम की कीमत 30 हजार से 1 लाख रुपए तक होती है। आम उपभोक्ता के लिए यह बड़ा खर्च है।
रखरखाव और लाइफ: बैटरी 5 से 7 साल बाद बदलनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ने की आशंका रहती है।

सब्सिडी पर चर्चा

चर्चा में मुद्दा उठा कि यदि बैटरी स्टोरेज सिस्टम अनिवार्य किया जाता है तो उसका खर्च कौन उठाएगा? क्योंकि एक घरेलू बैटरी सिस्टम की लागत पैनल के मुकाबले अधिक होती है। यह भी सुझाव आया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बैटरी पर भी सब्सिडी दें।

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