
फोटो- जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह और पंजाब सीएम भगवंत मान
Rajasthan News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की उठाई गई 1.44 लाख करोड़ रुपए की पानी रॉयल्टी की मांग को राजस्थान सरकार ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने स्पष्ट कहा कि यह मांग न केवल तथ्यों से परे है, बल्कि पूरी तरह असंवैधानिक भी है। उन्होंने कहा कि पानी किसी प्रकार की व्यापारिक वस्तु नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय संसाधन है, जिसका उपयोग देशहित में किया जाता है।
राजस्थान सरकार का कहना है कि कोई एक राज्य पानी पर रॉयल्टी या आर्थिक दावा करना संविधान की भावना के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राजस्थान सरकार ने पंजाब के दिए गए 1920 के समझौते के हवाले को भी खारिज कर दिया। मंत्री के अनुसार, यह समझौता ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर रियासत (जो अब पाकिस्तान में है) और बीकानेर रियासत के बीच हुआ था। उस समय पानी के बदले भुगतान ब्रिटिश सरकार को किया जाना तय था, न कि पंजाब को।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद इस समझौता का कोई आधार नहीं रह जाता। इसलिए वर्तमान समय में उस समझौते के आधार पर रॉयल्टी की मांग करने का कोई मतलब नहीं है।
राजस्थान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आजादी के बाद रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के जल बंटवारे को लेकर 1955, 1959 और 1981 में समझौते हुए थे। इन सभी समझौतों में राज्यों के बीच विचार-विमर्श के बाद पानी का बंटवारा तय किया गया, लेकिन कहीं भी रॉयल्टी या किसी प्रकार के भुगतान का प्रावधान नहीं किया गया।
इन समझौतों के तहत राजस्थान को निर्धारित मात्रा में पानी आवंटित किया गया, जो वर्तमान में भी लागू है और इसी आधार पर पानी की आपूर्ति हो रही है।
राजस्थान सरकार ने अपने पक्ष में संविधान के अनुच्छेद 262 का हवाला दिया है। इसके अनुसार अंतरराज्यीय नदियों के जल के उपयोग, वितरण और नियंत्रण से जुड़े विवादों का निपटारा संसद के बनाए गए कानूनों के तहत ही किया जा सकता है। मंत्री ने कहा कि इस संवैधानिक व्यवस्था के तहत पानी को राष्ट्रीय संपत्ति माना जाता है, न कि किसी राज्य की निजी संपत्ति। इसलिए पंजाब का रॉयल्टी की मांग करना कानूनी रूप से भी सही नहीं है।
राजस्थान को वर्तमान में बीकानेर नहर, राजस्थान फीडर भाखड़ा मेन लाइन और सरहिंद फीडर के माध्यम से पानी मिलता है। इन सभी का संचालन भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड (BBMB) के जरिए किया जाता है, जो केंद्र सरकार की देखरेख में काम करता है। इस पूरी व्यवस्था में कहीं भी पंजाब को अलग से रॉयल्टी देने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए राजस्थान ने इसे पूरी तरह निराधार बताया है।
राजस्थान सरकार के इनकार के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार इस मामले को कोर्ट में लेकर जाएगी। उन्होंने कहा कि अदालत में दोनों पक्ष अपना पक्ष रखेंगे और जो भी निर्णय होगा, वह कानून के अनुसार माना जाएगा।इस पूरे विवाद के बाद दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ गया है। आने वाले समय में यह मामला कानूनी और राजनीतिक रूप से और ज्यादा गंभीर रूप ले सकता है।
Published on:
20 Mar 2026 07:16 pm
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